*“**विवेकानंद जयंती पर शासकीय महाविद्यालय उतई में उनके विचारों पर चर्चा*उतई *(सतीश पारख)* अटूट राष्ट्र प्रेम के प्रतिमूर्ति स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस के अवसर पर शासकीय दानवीर तुलाराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय उतई में व्याख्यान का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश पांडे ने विख्यात अध्यात्मिक गुरू स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के उद्धरणों से एन.सी.सी. के कैडेट्स एवं एन.एस.एस. के स्वयं सेवकों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि “जब स्वामी जी विदेश से लौटे तो उन्होंने रेतीली भूमि पर लोट-लोट कर अपने धरा प्रेम को पुष्ट किया। धर्मोपदेश हेतु भ्रमण करते हुए उन्होंने देश-विदेश में भारतीय संस्कृति को अमिट छाप छोड़ी। उनके वेदांत दर्शन की व्याख्या से पूरा विश्व भारत को जानने को उत्सुक हुआ। शिकागो का सर्वधर्म सम्मेलन आज भी उन्हें चिरस्मरणीय बनाये हुए हैं। उनके विश्वबंधुत्व की भावना ने सारे संसार को एकता का पाठ पढ़ाया। राष्ट्र प्रेम, सेवा, दया, प्रेम व युवा शक्ति के संवर्धन के बीज उनके व्यक्तित्व से झरते थे। उन्होंने युवाओं को साहस एवं शक्ति दी और लक्ष्य के प्रति समर्पित होने का पाठ पढ़ाया।” हिन्दी के विभागाध्यक्ष डॉ. सियाराम शर्मा ने कहा कि “स्वामी विवेकानंद भारतीय नवजागरण के पुरोधा थे। वे भारतीय संस्कृति व परम्परा के अग्रदूत थे। उन्होंने न केवल भारतीय परम्परा की शक्ति को पहचाना बल्कि उनके विचार भविष्योन्मुख थे। अमेरिका में रहते हुए भी वे भारतीयों की शिक्षा के लिए चिंतित रहते थे। भारतीयों में सामाजिक बदलाव लाने के लिए वे सर्वप्रथम शिक्षा को महत्व देते थे क्योंकि शिक्षा व्यक्तित्व को रूपांतरित करता है। स्वामी जी भारतीय एकता में जाति व्यवस्था को बाधक मानते थे। वे समतामूलक समाज व देश का निर्माण करना चाहते थे”। कार्यक्रम में एन.एस.एस. स्वयं सेवकों ने लक्ष्य गीत प्रस्तुत किया। एन.सी.सी. की कैडेट कु. खुशबू, गीताजंली व त्रिलोक ने इस अवसर पर अपने विचार रखे। तरूण ने इस अवसर पर अपनी स्वरचित कविता का पाठ किया। इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. ए. के. मिश्रा, डॉ. मधुलिका रॉय, डॉ. विद्या पंचांगम, प्रो. अर्चना पाण्डेय, डॉ. राजबाला गुरू, प्रो. राकेश मिंज, अब्दुल हबीब कुरैशी उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन लेफ्टिनेंट डॉ. अनुसूईया जोगी ने किया। आभार प्रदर्शन एन.एस.एस. ऑफिसर प्रो. रितेश नायक ने किया।

