खबर हेमंत तिवारी पाण्डुका पाण्डुका l 6 जनवरी 2023 को पौष पूर्णिमा पर माता शाकंभरी की जयंती मनाई गई l मां शाकंभरी वनस्पति की देवी मानी जाती हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शाकंभरी नवरात्र की शुरुआत होती है और इस महीने की पूर्णिमा तिथि पर इसका समापन होता है lग्राम सरकड़ा निवासी जगतू राम पटेल, सोहद्रा बाई पटेलनागेंद्र पटेल ,चंद्रशेखर पटेल, दुर्गा पटेल ने बताया कि आदिशक्ति मां दुर्गा ने आखिर क्यों लिया शाकंभरी अवतार, मां शाकंभरी देवी, दुर्गा का ही सौम्य रूप हैl इन्हें शताक्षी नाम से भी जाना जाता है. आइए जानते हैं आदिशक्ति मां दुर्गा ने आखिर क्यों लिया शाकंभरी अवतार, मां शाकंभरी देवी को वनस्पति की देवी माना गया है इनकी पूजा में ताजे फल और सब्जियों का भोग लगाना जरूरी है lहिंदू मान्यताओं के अनुसार पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शाकंभरी नवरात्र की शुरुआत होती है और इस महीने की पूर्णिमा तिथि पर इसका समापन होता हैl शांकभरी जयंती को शाकंभरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है l इस दिन कैसे करें माता की पूजा और क्या है मुहूर्त …. तिथि 6 जनवरी 2023, शुक्रवार प्रात: 2 बजकर 14 मिनट से शुरू हो रही है l अगले दिन यानी कि 7 जनवरी 2023 को सुबह 04 बजकर 37 मिनट पर शाकंभरी पूर्णिमा का समापन होगा lमां शाकंभरी की कथापौराणिक कथा के अनुसार पृथ्वी पर भयंकर अकाल पड़ गया था l सूखे के कारण लोग जल के लिए तरसने लगे. पानी और खाद्य का गंभीर संकट देखकर भक्तों ने मां दुर्गा से इस समास्या का समाधान करने की प्रार्थना की तब देवी दुर्गा ने शाकंभरी रूप का अवतार लिया,.. कहते हैं कि मां शाकंभरी की हजारों आंखों से 9 दिन तक लगातार पानी बरसता रहा, जिससे सूखे की समस्या खत्म हो गई और हर जगह हरियाली छा गई.

