दोषी कौन..प्रशासन..प्रतिनिधि या खुद जनता
उतई ( सतीश पारख) सोचो अगर आपके घर या पड़ोस में आग लग जाय और आप अग्निशमन की सेवा ले रहे हैं लेकिन तभी अचानक ऐसे रास्ते मे गाड़ी चली जाय जो आगे बंद हो और आपको पता ही न हो ,,,,गाड़ी निकलने या दूसरे रास्ते आने तक सब कुछ स्वाहा,,,दोष किसका अपने करम का या सरकार का,,,,,,नही,,,,,नही,,,,,,,,दोष हमारा है साहब,,,,,,,यही हुआ जब उतई सरकारी अस्पताल के पास लोक निर्माण विभाग की लापरवाही की पराकाष्ठा के चलते अग्नि शमन वाहन को वापस लौट कर दूसरे रास्ता से जाना पड़ा,,छोटा सा संकेतक बोर्ड नही लगाने का खामियाजा आज जिनके यहां आग लगी हो उनको भुगतना पड़ सकता है,,नगर प्रशासन भी कुम्भकर्ण से आगे निकल चुका है,,किंतु सोचने समझने बोलने वाला कोई नहीं..अधिकारी जन प्रतिनिधि सब कुर्सी के नशे में चूर..कोई कह दे तो पद की धौंस दिखाने और शासकीय कार्य में बाधा की शिकायत कर पुलिस कार्यवाही की धमकी बस यही सत्ता और प्रशासन की तासीर बन गई है।
