जीवन जीने की कला सिखाती है भागवत – तोरण महाराज

पाटन। अमृत मनुष्य को केवल अमरता दिला सकती है, लेकिन भागवत कथा मोक्ष का द्वार खोलकर मानव को भगवान से मिला देती है। यह कथा मानव को जीवन जीने की कला सिखाती है। यदि हम भागवत में बताए गए आदर्शों को आत्मसात करेंं और भगवान चरित्र को जीवन में अपना ले तो हमारा मानव जीवन सार्थक हो जाएगा।
उक्त बातें ग्राम पतोरा में सार्वजनिक हनुमान मंदिर समिति द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दूसरे दिन कथा प्रवचन में कांकेर कुरना के पंडित तोरण महाराज ने कहीं। उन्होंने भागवत कथा को सभी पुराणों और ग्रंथों का सार बताया और कहा कि मोक्ष के मार्ग के सात सोपान इसमें समाहित है। जिन्होंने इन सात सोपानों को समझ लिया और जीवन में आत्मसात कर लिया, उनके इसी जीवन में भगवत प्राप्ति को कोई रोक नहीं सकता। भागवत का दूसरे चरण विचारणा पर विस्तृत चर्चा करते हुए पंडित तोरण शर्मा ने कहा कि विचार शुद्ध होता है तो मन भी साफ होने लगता है और साफ मन में भगवान का वास होता है। इसलिए विचार की शुद्धि पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस घर में शांति होती है, वहां साक्षात भगवान निवास करते है।
पारिवारिक विखंडन पर जताई चिंता
उन्होंने मौजूदा दौर में पारिवारिक विखंडन की अपसंस्कृति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सामाजिक दृष्टिकोण से पति पत्नी सांसारिक जीवन रुपी रथ के दो पहिए हैं। दोनों को सन्मति और सामंजस्य से जीवन में व्यवहार करना चाहिए। ऐसा रहा तो पारिवारिक विखंडन जैसी स्थिति नहीं बनेगी और आने वाली पीढ़ी सुसंस्कारित होगी।
सुख बांटना सबसे बड़ा धर्म

पंडित तोरण महाराज ने कहा कि सुख बांटना मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। इसलिए ऐसा कार्य कभी नहीं करना चाहिए जिससे किसी को दुख हो। जिनता सूख बांटा जाएगा उतनी संतुष्टि बढ़ती जाएगी और इससे मानव जीवन सार्थकता की ओर बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां बुलाया नहीं जाए वहीं नहीं जाना चाहिए। ऐसे जगहों पर अपमान का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सती प्रसंग के माध्यम से इस पर प्रकाश भी डाला।

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