सेलूद। भागवत का अर्थ है भक्ति, ज्ञान वैराग्य और तारण। भागवत न सिर्फ आध्यात्म सिखाती है, बल्कि भागवत से जीवन जीने की राह भी मिलती है। भागवत का आध्यात्मिक अर्थ – भा यानी भक्ति, ग यानी ज्ञान, व मतलब वैराग्य और त से तत्व है। गृहस्थ गृहस्थ जीवन में भी रहकर वैराग्य धारण कर सकते हैं। कैसे कर सकते हैं, ये कला भागवत में है। जन्म लिया, पढऩे के बाद कमाया खाया और जीवन का अंत हो जाता है। कई बार मालुम ही नहीं लगता कि जीवन का उद्देश्य क्या है। भागवत यही कला सिखाती है। त्याग, तपस्या, मोक्ष के साथ जीवन जीने की सही राह भागवत की बताती है। सद्गुणों और सतकर्म को हमने जीवन में कितना उतार लिया है। ये मंथन करने का विषय रहता है। कैसे उतार सकते हैं, ये कला भी भागवत सिखाती है। भक्ति, ज्ञान वैराग्य और तारण भागवत में ही समाहित है।
उक्त बातें ग्राम सेलूद में मथुरा वृंदावन से पहुंचे कथा व्यास आचार्य श्रीकांत त्रिपाठी ने भागवत के महत्व पर प्रकाश डाला। भागवत के श्रवण् से इश्वर और हमारे पूर्वजों को सर्वाधित प्रसन्नता होती है। जब जीवन में भक्ति की शुरुआत होती है तो हमारे भीतर ज्ञान पैदा होता है। ज्ञान के साथ वैराग्य की भी उत्पत्ति होती है। इसके बाद वैराग्य मजबूत होने पर धीरे-धीरे परमात्मा की प्राप्ति होती है।
ग्राम सेलूद में राय परिवार द्वारा आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। वृंदावन धाम से पधारे आचार्य श्रीकांत त्रिपाठी एवं उनकी पुत्री शीघ्रता त्रिपाठी द्वारा भागवत कथा का प्रसंग प्रतिदिन शाम 4 बजे से 7 बजे तक प्रसंग सुनाया जाएगा।
जीवन जीने की सही राह सिखाती है श्रीमद् भागवत कथा- श्रीकांत त्रिपाठी
