जिंदा आदमी को मैं जिंदा हूं कहना पड़ता है, रिजर्व बैंक इस निर्देश को तत्काल वापस ले-विजय झा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य समेत हिंदुस्तान में भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देश के तहत वर्ष में एक बार सेवानिवृत्त पेंशनरों को पेंशन प्राप्त करने हेतु फिल्मी स्टाइल में स्वयं खड़े होकर यह प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता है कि मैं जिंदा हूं। यह अत्यंत पीड़ादायक अव्यावहारिक एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। इसलिए छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने भारतीय रिजर्व बैंक से मांग की है कि इस अव्यवहारिक, अमानवीय, निर्देश को तत्काल वापस लिया जाए। क्योंकि यह पुराना निर्देश है अब आधार कार्ड में सब संभव हो जाता है।
संघ के संरक्षक विजय कुमार झा एवं प्रवक्ता विजय डागा ने बताया है कि सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए नवंबर में प्रतिवर्ष जीवित प्रमाण पत्र बैंक में जमा करना पड़ता है। बुजुर्ग व्यक्ति बैंक में या सक्षम प्राधिकारी के पास खड़े होकर निवेदन करता है कि सर मैं जिंदा हूं। प्रमाण पत्र दे दे। यह व्यवस्था आधार कार्ड के प्रचलन में आने के पूर्व से है कलयुग में आधार कार्ड की महत्ता को 5 हजार साल पूर्व तुलसीदास जी ने रामायण में लिखा था, कि कलयुग केवल नाम अधारा, सुमरि सुमरि नर उतरही पारा इसका अर्थ उस समय से तुलसीदास जी ने इशारा किया था कि कलयुग में कहीं आने-जाने एक देश से दूसरे देश में पार उतरने के लिए आधार कार्ड की जरूरत पड़ेगी। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार में भी आधार कार्ड की मांग वहां के व्यवस्थापक करते हैं। ऐसी स्थिति में आधार कार्ड को पर्याप्त दस्तावेज मानना चाहिए। यह व्यवस्था तब थी जब बुजुर्ग पेंशनरों की मृत्यु के बाद भी पेंशन जमा होते रहते थे तथा बैंकों से आरण हो जाता था एवं वैधानिक समस्याएं उत्पन्न होती थी। अब मृत्यु के बाद आधार कार्ड,ऑनलाइन,एटीएम,पेटीएम, की व्यवस्था में मृत्यु उपरांत कोई परिजन राशि का आहरण नहीं कर सकता है। जो ऐसा करेगा वह आपराधिक कृत्य में भारतीय अपराध संहिता के अंतर्गत दोषी होकर पुलिस कार्यवाही का सामना करेगा। इसलिए अब जीवित प्रमाण पत्र मांगना बुजुर्गों का अपमान करना है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष जी आर चंद्रा, संरक्षक अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, जिला शाखा अध्यक्ष रामचंद्र ताण्डी, प्रदीप उपाध्याय, नरेश वाढ़ेर, शेखर सिंह ठाकुर, विमल चंद कुंडू, पितांबर पटेल, आलोक जाधव, राजकुमार शुक्ला, अरुंधति परिहार, काजल चौहान, टार्ज़न गुप्ता, होरीलाल छेदैया, प्रवीण डिडवंशी, सुनील जरौलिया, आदि नेताओं ने भारतीय रिजर्व बैंक से मांग की है कि तत्काल जीवित प्रमाण पत्र मांगना बंद करें,अन्यथा पेंशनरों को पुराने मैनुअल में पेंशन भुगतान की व्यवस्था की जाए। बुजुर्गों को बैंक से पेंशन लेने की आवश्यकता व मजबूरी नहीं है।इस संबंध में वित्त मंत्री सीतारमैण भी वृद्धजनों के सम्मान के लिए उचित पहल करें।

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