रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि, छत्तीसगढ़ राज्य में आरक्षण व्यवस्था के चक्रव्यूह में छत्तीसगढ़ सरकार के फंसे होने के कारण प्रदेश में पीएससी से लेकर निचले स्तर पर समस्त प्रकार के नियुक्तियां साक्षात्कार प्रतियोगी परीक्षाएं भर्तियां स्थगित हो गई है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार छत्तीसगढ़ सरकार इस संबंध में शीघ्र निर्णय लेवे।
संघ के संरक्षक विजय कुमार झा एवं प्रवक्ता विजय कुमार डागा ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से मांग की है कि आदिवासी समाज के आरक्षण के बिंदु पर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार शीघ्र निर्णय लिया जावे। अनिर्णय की स्थिति में प्रदेश में 65 हजार सब इंस्पेक्टर की भर्तियां, हजारों चतुर्थ श्रेणी के लोक सेवा आयोग द्वारा लिए गए परीक्षा, डांटा एंट्री ऑपरेटर का साक्षात्कार आदि सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा भर्ती एवं प्रोन्नति आरक्षण के अड़गें के कारण रुकी हुई है। श्री झा ने कहा है कि राज्य सरकार को माननीय उच्च न्यायालय ने निर्देशित किया है कि 50% से अधिक आरक्षण होने के कारण प्रदेश में प्रभावशील 58 प्रतिशत आरक्षण को कम कर 50 प्रतिशत में सीमित किया जावे। माननीय उच्च न्यायालय ने किस संवर्ग का कम किया जाए यह निर्णय ना देकर राज सरकार पर निर्णय छोड़ दिया है। प्रदेश में वर्तमान में अनुसूचित जाति संवर्ग के 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति संवर्ग के 32 प्रतिशत, तथा अन्य पिछड़ा वर्ग संवर्ग के 14% आरक्षण व्यवस्था लागु है। इन तीनों प्रतिशत को जोड़ने पर कुल 58 प्रतिशत होता है। माननीय उच्च न्यायालय ने इसे 50 प्रतिशत करने का निर्णय पारित किया है। कुल मिलाकर आरक्षण व्यवस्था राज्य सरकार के पाले में माननीय न्यायालय ने गेंद डाल दिया है। ऐसी स्थिति में 58 से घटाकर 50 करने में किसी एक संवर्ग का 8% आरक्षण कम किया जाना असंभव है। इसलिए आनुपातिक रूप से तीनों संवर्ग का 8% आरक्षण जब तक नहीं घटाया जाएगा तब तक प्रदेश में किसी प्रकार की नियुक्ति, साक्षात्कार, पदोन्नति एवं प्रतियोगी परीक्षा राज्य सरकार लेने में असमर्थ है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष जी आर चंद्रा, महामंत्री उमेश मुदलियार, संरक्षक अजय तिवारी, जिला शाखा अध्यक्ष राम चंद्र ताण्डी, प्रांतीय सचिव प्रदीप उपाध्याय, शेखर सिंह ठाकुर, नरेश वाढेर, उप प्रांतीय अध्यक्ष विश्वनाथ ध्रुव, राज कुमार शर्मा, विमल चंद कुंडू, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, लघु वेतन कर्मचारी संघ प्रांतीय अध्यक्ष बिंदेश्वर राम रौतिया, वाहन चालक संघ अध्यक्ष मनीष ठाकुर, अनियमित कर्मचारी संघ संरक्षक गोपाल प्रसाद साहू राजकुमार कुशवाहा, महिला प्रतिनिधि डॉ अरुंधति परिहार, काजल चौहान, सुनील जरौलिया, पितांबर पटेल, पटवारी संघ अध्यक्ष कमलेश तिवारी, आदि नेताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि क्वांटिफिएबल डाटा आयोग के प्रतिवेदन का इंतजार करने में प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे पर कुठाराघात होगा तथा भर्ती पदोन्नति साक्षात्कार पर विपरीत प्रभाव पड़ते हुए प्रदेश के नवयुवकों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि इस आयोग का अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण से सीधा लेना-देना नहीं है,इसलिए 8% आरक्षण कम कर प्रदेश में रुके हुए प्रक्रियाओं के गतिरोध को हटाकर प्रारंभ किया जाना चाहिए, अन्यथा छत्तीसगढ़ के विकास में विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
