देवरी में उप तहसील के नाम को लेकर ग्रामीण बैठे धरने पर,मुख्यमंत्री ने आज ही उप तहसील मार्री बंगला -देवरी का किया था उन्नयन


देवरीबंगला / उप तहसील के नाम को लेकर देवरीबंगला के ग्रामीण उप तहसील के सामने धरने पर बैठ गए, बाद मे बरसते पानी में स्टेट हाईवे पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। मुख्यमंत्री ने आज ही उप तहसील मार्री बंगला- देवरी का उन्नयन कर पूर्ण तहसील का वर्चुअल शुभारंभ किया था। देवरीबंगला के ग्रामीणो की मांग है कि पूर्ण।
तहसील का नामकरन देवरीबंगला के नाम से किया जाये। ग्रामीण 1:00 बजे चक्का जाम पर बैठ गए। इसी बीच तेज हवा के साथ जमकर बरसात हुई फिर भी ग्रामीण सड़क पर बैठे हुए हैं।
क्या है मामला :- मध्यप्रदेश के समय वर्ष 1999 में देवरीबंगला में उप तहसील खोलने आदेश जारी हुआ था। इसी समय एक अन्य आदेश मारी बंगला के नाम से भी जारी हुआ था। ग्रामीण टुकेश्वर देवांगन तथा जालम ठाकुर ने बताया कि उसी आदेश के तहत वर्ष 1989 में उप तहसील देवरीबंगला के भवन निर्माण हेतु 26.57 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी तथा इसका भूमि पूजन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था। उपसरपंच मनोज देवांगन ने बताया कि शासन के आदेश के तहत देवरीबंगला तहसील के लिए 13 अधिकारी कर्मचारियों की पर स्थापना की गई है। इसके बाद भी दूसरे गांव के नाम से खोलना न्यायोचित नहीं है।
सभी सुविधाएं हैं देवरीबंगला में :- ग्राम पटेल प्रेमलाल साहू व सतीश सिंह ने बताया कि जहां वर्तमान में पूर्ण तहसील खोला जा रहा है उस गांव में शासकीय स्कूल व ग्राम पंचायत के अलावा कोई शासकीय कार्यालय नहीं है। दूसरी ओर देवरीबंगला में पुलिस थाना, पटवारी हल्का, राजस्व निरीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पोस्ट ऑफिस, पशु औषधालय, तीन बैंक, नलकूप निर्माण इकाई, धान खरीदी केंद्र सहित सभी शासकीय कार्यालय तथा सुविधाएं उपलब्ध है। संसदीय सचिव व विधायक ने दोनों गांव के प्रमुख लोगों को बैठा कर तय किया था कि पूर्ण तहसील का नाम देवरी मारी होगा। मुख्यमंत्री से भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान भी विवाद को देखते हुए पूर्ण तहसील की घोषणा रोक दी गई थी। मुख्यमंत्री के वर्चुअल उद्घाटन में देवरी बंगला की सरपंच को भी आमंत्रित नहीं किया गया इससे भी ग्रामीणों में आक्रोश है। चक्का जाम में बड़ी संख्या में महिलाएं एवं ग्रामीण शाम तक बैठे हुए है।

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