स्वास्थ्य प्रशासन ने सस्ती दवा की दुकान को अस्पताल के अंदर कर दिया, *जबकि महंगी दवा अस्पताल के गेट के सामने, यह सोची समझी साजिश, *सस्ती दवा का दावा राज्य शासन का *, *दुर्भाग्य राज्य की दवा केंद्र से महंगी,* केंद्र पास – राज्य फेल

लोकेश्वर सिन्हा गरियबन्द
गरियाबंद जिला अस्पताल के प्रवेश द्वार में पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित था, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने एक झटके में ही सस्ती दवा की दुकान को षडयंत्र पूर्वक प्रवेश द्वार से हटा कर अस्पताल के अंदर शिफ्ट कर दिया है। जन औषधि केंद्र से मरीजों को राहत थी, सस्ती दवा मिलती थी, लेकिन प्रशासन ने गरीब पीड़ित मरीजों का ख्याल नहीं रखते हुए यहां से ही प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को अस्पताल के प्रवेश द्वार से हटा दिया है, प्रशासन के इस निर्णय से आम जनता में जमकर नाराजगी व्याप्त है, लोगों का यहां तक कहना है कि प्रशासन तो जनता के लिए बना है, जनता के हितों का इन्हें ख्याल रखना चाहिए, आखिर यहां का प्रशासन गरीबों के प्रति इतना कठोर क्यों हो गया है, इस मामले में प्रशासन की जमकर किरकिरी हो रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि जिला मुख्यालय के पीड़ित मरीजों के लिए तो केंद्र और राज्य सरकार ने अलग- अलग एक -एक औषधि केंद्र खोल दिए है, दोनो ही सस्ती दवा के दावे करते है। लेकिन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की दवा ही सस्ती है, यह हर कोई कह रहा है, वही राज्य सरकार द्वारा खोले गए धन्वंतरी मेडिकल में महंगी दवा बेची जा रही है। इस बात को लेकर आश्चर्य है कि दोनो सरकार की मंशा पीड़ित मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराना है, वही इन दोनो केंद्रो को बखूबी संचालित करने के लिए दायित्व का केंद्र बिंदु स्थानीय प्रशासन ही है। परंतु स्थानीय प्रशासन का जहा सस्ती दवा मिलती है, इस प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को लेकर रवैय्या नकारात्मक है, इसके विपरित धनवंतरी मेडिकल जिसमे मरीजों को ऊंचे दाम पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही है, इस मेडिकल को स्थानीय प्रशासन ज्यादा तवज्जो दे रहा है। स्वास्थ्य के मामले में स्थानीय प्रशासन का दोहरा मापदंड समझ से परे है। इसको देखते हुए प्रशासन पूरी तौर पर निशाने में है।
जिले में लोगों को सस्ती दर पर दवा उपलब्ध कराने के लिए राज्य शासन ने धनवंतरी जेनरिक मेडिकल स्टोर योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना के तहत धनवंतरी जेनरिक मेडिकल स्टोर्स से उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां मिलने का दावा किया गया था, लेकिन इसकी हकीकत कुछ और ही है। जिला मुख्यालय में संचालित धनवंतरी मेडिकल स्टोर में ना ही सभी प्रकार की जरूरी दवाइयां उपलब्ध रहती है और ना ही ज्यादा सस्ती कीमत में दवाइया मिल रही है। यहां मिलने वाले दवाई की कीमत प्रधामंत्री जन औषधि केंद्र में मिलने वाले दवाई की कीमत से कई ज्यादा है। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों को मिलने इस लाभ से दूर कर रहा है। इसके बदले धन्वंतरी मेडिकल स्टोर्स को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुर्सी बचाने गरीबों को मिलने वाली लाभ की केंद्रीय योजना को ही किनारे करने में तुले हुए है।
जानकर ताज्जुब होगा कि जिला मुख्यालय में बीते सात साल से जिला अस्पताल से संचालित हो रहे प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को हटाकर उक्त स्थान में मुख्यमंत्री धनवंतरी मेडिकल स्टोर खोल दिया गया है। जन औषधी की दुकान को मुख्य प्रवेश द्वार गेट से हटाकर भीतर कर दिया गया है। यह केवल इसलिए कि जिस सोच के साथ धनवंतरी मेडिकल स्टोर की शुरुआत की गई थी, वो प्रतिफल शासन को नही मिला, तो स्थानीय प्रशासन ने केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री जन औषधी केंद्र को बिक्री कमजोर करने की साजिश की, ताकि धनवंतरी चल सके। अब यही मामला प्रशासन के कार्यप्रणाली में प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है।
अब यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में भी आ गया हैं। जिला मुख्यालय में यह भी चर्चा है की धनवंतरी मेडिकल स्टोर में दवाई सप्लाई करने वाले एक व्यापारी प्रशासन के बड़े अफसर के माध्यम से इस दुकान को हटाने को साजिश रची है। बकायदा प्रशासन पर उपर से नीचे तक दबाव बनाया गया और कामयाब भी हो गए हैं। स्वास्थ्य प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी भी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को प्रवेश द्वार के गेट से बाहर किए जाने को लेकर कहते हैं कि ऊपर लेवल से मौखिक आदेश के तहत दुकान को हटाया गया है। उस स्थान को धनवंतरी मेडिकल स्टोर को दे दिया है।
अगर सरकारी दस्तावेजों पर नजर डाली जाए तो जिला अस्पताल में बीते 7 साल से संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को तत्कालीन स्थानीय प्रशासन ने अस्पताल के गेट के पास जगह आवंटित कर खोला था, जबकि वर्तमान में धनवंतरी मेडिकल को नगर पालिका द्वारा कचहरी रोड में संचालन हेतु दुकान आवंटित की है, धनवंतरी का लाइसेंस भी कचहरी मार्ग स्थित दुकान के लिए जारी हुआ है, लाइसेंस में भी कचहरी मार्ग स्थित नगर पालिका की दुकान का ही पता लिखा हुआ है। अभी भी सरकारी रिकॉर्ड में यही पता है, इसके बाद भी यह दुकान पहले कई दिन तक अस्पताल के बाहर किराए की दुकान में संचालित थी जो अब जन औषधी केंद्र वाली जगह में संचालित हो रही है।
निशाने पर प्रशासन
इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन कटघरे में है, जब इसकी पड़ताल की गई तो रोचक बात सामने आएगी कि मौखिक आदेश से ही प्रशासन ने यह कार्य कर दिया है, दबी जुबान स्वास्थ्य प्रशासन भी कह रहा है कि बड़े अफसर का फरमान है, पालन तो करना पड़ेगा। यहां का प्रशासन मौखिक आदेश चलता है, यह स्पष्ट देखने को मिल रहा है।
दवाई सप्लायर की जबरदस्त सेटिंग
इस मामले को दबाने के लिए प्रशासन के साथ जबरदस्त सेटिंग का खेल चल रहा है, पर्दे के पीछे से दवाई सप्लायर की भूमिका सामने आई है, यहां दवा व्यापारी की राजनीतिक रसूख के चलते प्रशासन भी बौना साबित हो रहा है, देखा जाए तो इस मामले में प्रशासन को नचा रहा है, विपक्ष इसे मुद्दा बनाने के लिए अभियान में जुट गई है, सूत्रों का यहां तक कहना है कि धनवंतरी मेडिकल स्टोर का पता बदलने के लिए आवेदन भी प्रशासन को सौंपा गया है, रसूखदार और ऊंचे पहुंच वाले यह दवा व्यापारी पता भी बदलवा लेंगे, ऐसी चर्चा है।

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ जी आर टंडन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की दुकान को हटाया गया है। उस स्थान को धनवंतरी मेडिकल स्टोर को दे दिया है।

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