पूर्व सरपंच सुरेश सिंगौर व उनके परिवार पर लगे गंभीर धाराएं कोर्ट ने हटाया, धारा 307/149/ से किया गया दोष मुक्त

दुर्ग। पाटन विकासखंड अंतर्गत ग्राम रूही के पूर्व सरपंच सुरेश सिंगौर व उनके परिवार का गांव के ही रामशरण उर्फ लोखु सिंगौर के परिवार के साथ हुवे मारपीट के मामले में गुरुवार को आरोप पत्र तय करने हेतु आरोपीगण सुरेश सिंगौर वगैरह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीपी सिंह ने पैरवी किया।
आरोपीगण की ओर से अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार वर्मा साहब के कोर्ट में आरोप तय करने हेतु तर्क प्रस्तुत किया गया, न्यायालय ने सभी पक्ष को सुनने के बाद आरोपीगण सुरेश सिंगौर वगैरह को हत्या के प्रयास की धारा 307 व 149 से दोषमुक्त करते हुवे धाराएं हटाकर प्रकरण प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अन्य धाराओं पर सुनवाई हेतु स्थान्तरित कर दिया।
गौरतलब हो कि दिसंबर 2021 में दो परिवारों के बीच हुए मारपीट के मामले में पाटन पुलिस ने काउंटर केस दर्ज करते हुए दोनों पक्ष को आरोपी बनाया था जिसमें ग्राम रूही निवासी पूर्व सरपंच सुरेश सिंगौर और व उनके परिवार के 10 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा सहित अन्य धाराओं पर अपराध पंजीबद्ध किया गया था वही रूही निवासी रामशरण उर्फ लोखु सिंगौर व उनके परिवार के अन्य लोगों के खिलाफ पूर्व सरपंच श्रीमती ईश्वरी सिंगौर के शिकायत पर काउंटर केस दर्ज करते हुए विभिन्न धाराओं पर अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
धारा 307/149/ हत्या के प्रयास मामले में दोष मुक्त किए जाने के बाद पूर्व सरपंच सुरेश सिंगौर ने कहां की है मुझे व मेरे परिवार को राजनीतिक रंजिशवश झूठे प्रकरण में फंसाया गया था, हमें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास था यही कारण है कि विचारण न्यायालय द्वारा आरोप तय करते समय ही धारा 307 एवं 149/ से हमे दोष मुक्त कर दिया गया है , आज निश्चित ही सत्य की जीत व असत्य की हार हुई है, यह अब साबित हो चुका है ।
न्याय आज भी जिंदा है तथा न्यायालय की गरिमा व प्रतिष्ठा बढ़ी है नही तो पुलिस और प्रार्थी ने मिलकर मेरे व मेरे पूरे परिवार को गंभीर अपराध में फंसाकर जेल भेजवाने में सफल हो गए थे जबकि प्रार्थी पक्ष हमारे घर में घुसकर गंभीर रूप सेहम लोग के साथ मारपीट किये थे पुलिस जानबूझकर उन लोगो पर उचित धारा नही लगाई थी जिस पर अब मैं त्वरित कार्यवाही न्यायालय के माध्यम से करूँगा, बाकी अन्य धाराओं पर भी निश्चित जीत हासिल होगी।

वर्शन

यह एक सामान्य घटना था राजनीतिक रंजिशवश अजमानतीय धाराओं को जोड़ा गया था, आज विचारण न्यायालय ने मामले को धारा 307 / एवं 149/के लिए उपयुक्त न मानते हुवे धारा 307/149 से दोषमुक्त करते हुवे आगे की विचरण के लिए प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को मामला स्थानांतरण कर दिया गया है।

बीपी सिंह अधिवक्ता

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