बालोद।आज हम आपको बालोद जिला के बालोद ब्लॉक के अन्तर्गत ग्राम चरोटा के एक महिला कृषक जो की आपदा काल मे खेती की उन्नत तकनीक से इस प्रकार जुड़ी कि वह इस भयावक स्थिति मे अपनी कड़ी मेहनत से लोगो को बतला दिया कि कृषि कार्य मेहनत और तकनीकी सहायता से की जाए तो अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है |
बालोद जिला कृषि कार्यो मे चर्चित है लेकिन कोरोना काल के चलते कृषि कार्यो पर भी लॉकडाउन का बुरा असर होने लगा | उसी समय रिलायंस फाउंडेशन द्वारा ग्राम में होने वाले कृषि कार्यक्रम की जानकारी श्रीमति तुलसी बाई को मिली कि पिछले दो वर्षो से ग्राम चरोटा मे रिलायंस फाउंडेशन अपना तकनीकी सहायता के माध्यम से अपना कृषि सम्बन्धी सलाह दे रहा है | उसके बाद महिला कृषक ने अपने कृषि मे हो रहे समस्या को अपने पडोसी से साझा करते हुए बतलाया कि पति न होने के कारण परिवार के 4 सदस्यों की जिम्मीदारी है जिसमे स्वमं तुलसी बाई और उनके 3 पुत्री है जिनका भरण पोषण तथा घर का खर्च किसानी और रोजी मजदूरी के माध्यम से चल जाती है, लेकिन बच्चों के विवाह की चिंता खाई जा रही थी और कम जमीन होने, सब्जी की खेती के जानकारी के अभाव के कारण घर की आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही है, यह सब सुनकर उसके पडोसी ने सलाह दिया की आप एक बार अपनी खेती की समस्या रिलायंस फाउंडशन के द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे समिलित होकर रखे |
27.01.2022 को रिलायंस फाउंडेशन द्वारा होने वाले ऑडियो कॉन्फ्रेंस की जानकारी तुलसी बाई को मिली जिसमे वह सम्मिलित हुई उसने फिर अपना प्रश्न रखा फूलगोभी ग्रोथ नही हो रहा और पौधा सुख रहा है फिर उसे हमारे कृषि विभाग के विशेषज्ञ श्रीमान हुतेन्द्र डनसेना ने उसके सवाल का जवाब दिया कि फूलगोभी मे कट बनने पर सल्फर 10 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से डाले जिससे अच्छी पैदावरी आयेगी तथा फूलगोभी की खेती के आदि विषयों के बारे मे पूर्ण जानकारी दी | उसके बाद वह रिलायंस फाउंडेशन की सेवा से प्रभावित हुये उसके बाद श्री मति तुलसी बाई समय समय पर रिलायंस फाउंडेशन के विभिन्न कार्यक्रम मे समिलित होने लगी तथा कुछ टोल फ्री के माध्यम से जानकारी लेती गई |
उसके बाद श्री मति तुलसी बाई ने समय समय मे फूलगोभी की फसल आधुनिकता से खेती की जानकारी कृषि विशेषज्ञों से लेती गई फिर उसने अपने 1 एकड़ जमीन पर रबी 2022 मे अधुनिकी खेती कर कम से कम लागत पर फूलगोभी का उत्पादन किया | उसने 1 एकड़ जमीन पर 60 क्विंटल फूलगोभी पैदावार अप्रैल 2022 की जिसे उसने 13 रुपये किलोग्राम की दर से बेच कर 78,000 रुपये की प्राप्ति हुई उसमे अपना लागत खर्च 35,000 रुपये काटने के बाद उसे 43,000 रुपया प्राप्त हुआ जिससे उसे अब अपनी जिंदगी और परिवार की आर्थिक स्थिति को विकास करने की राह दिखने लगी है और इसी तरह खेती कर अपनी बच्ची की शिक्षा और बहन के विवाह लिए पैसा एकत्रित किए | वह अपने जीवन तथा परिवार के आर्थिक स्थिति में प्रगतिशील होने का पूर्ण रूप से श्रेय रिलायंस फाउंडेशन तथा कृषि विभाग को देते हुए आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिया और भविष्य मे इस तकनीक से जुड़ी रहूंगी कहा ।
आपदा काल में अधुनिकीकरण कृषि प्रसार बना किसानों का सहारा
