आज विश्व तेली दिवस: गणेश चतुर्थी के दिन मनाई जाती हैं तेली दिवस, पढ़िए पूरी खबर विस्तार से

गणेश चतुर्थी के दिन तेली (साहू) समाज के द्वारा तेली दिवस मनाया जाता हैं। इस वर्ष बुधवार 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी के दिन तेली दिवस है। ऐसी मान्यता हैं कि, गणेश चतुर्थी के दिन गणनायक श्री गणेश जी के जन्म के साथ ही तेली समाज  के प्रथम पुरुष का जन्म हुआ था। उसी दिन से तेली समाज का विकास, विस्तार हुआ और आज तेली समाज सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त हो गया।

पिछले वर्ष गणेश चतुर्थी के दिन तेली दिवस  धूमधाम से मनाया गया था। इस वर्ष भी तेली दिवस मनाने की तैयारी की गई हैं। मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष देशभर में लगभग 500 स्थानों पर तेली समाज के द्वारा भव्य रूप से तेली दिवस मनाया जायेगा। जिसमें छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, झारखण्ड, उड़ीसा, बिहार, पंजाब सहित देशभर में तेली दिवस मनाने की सुचना प्राप्त हुई हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी जिलों के साथ राजधानी रायपुर में शहर जिला साहू संघ के तत्वाधान में संतोषी नगर स्थित कर्मा धाम में तेली दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जायेगा। 

पंडित घनश्याम साहू ने कहा, समाज को जागृत और जीवंत बनाने के लिए, आत्मबली और पुरुषार्थी बनाने के लिए, विद्यावान और संपदा सम्पन्न बनाने के लिए, सशक्त और संगठित बनाने के लिए तैलिक समाज के प्रथम पुरुष के जन्म के इतिहास को तेली दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। तेली दिवस  हमारे समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है।

प्रोफ़ेसर घनाराम साहू व पंडित घनश्याम प्रसाद साहू ने अपील करते हुए कहा, गणेश चतुर्थी 31 अगस्त 2022 को अपने घरों और प्रतिष्ठान में गणेश चतुर्थी के साथ तेली दिवस अवश्य मनायें। तेली दिवस कार्यक्रम को अपना व्यक्तिगत/ पारिवारिक उत्सव समझकर और अपना सामाजिक दायित्व मानकर अपने घरों, दुकानों एवं कार्यालयों में अवश्य आयोजित करें। इस आयोजन हेतु घानी सहित गणेश जी का फोटो उपयोग में ला सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, तेली दिवस के दिन सभी तैलिक समाज परिवार सहित तिल या सरसों तेल के 5 दीपक जलाकर भी संक्षिप्त रूप से तेली दिवस उत्सव मना सकते हैं। यह वह दिन है, जब हमारे महान पूर्वज ने देवाधिदेव महादेव भगवान शिव जी की कृपा से घानी अथवा ओखली – मूसल को आशीर्वाद के रूप में प्राप्त किया था और उसी के माध्यम से अपना व्यवसाय प्रारंभ किया था। इसलिए यह दिवस हम सब तैलिक वंशियों के लिए अत्यंत पावन और दिव्य है। 

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