फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत चरोदा भिलाई 3 मे 248 दल बनाए गये है ।प्रत्येक दलों मे दो सदस्यों रखे गये है। बीईईटीओ व स्वास्थ्य सुपरवाइजर सैय्यद असलम ने बताया कि साधारण भाषा मे इसको हाथी पांव बोलते है। संक्रांति मचछर के काटने से यह बीमारी होती है। माइक्रो फाइलेरिया बैक्टैरियम से होती है। इसके लक्षण 8 से 16 माह मे विकसित होता है । सर दर्द ,पसीना, भूख मे कमी ,हड्डी या जोडो मे दर्द ,घुटने के पीछे ,काख एवं अंडकोषों मे सूजन ,पैरो हाथ जन्नअंगो मे विकृति आना है। खंड चिकित्सा अधिकारी डा आशीष शर्मा ने बताया कि वर्ष मे एक बार डी ई सी ( टेबलेट) आयु अनुसार खाना चाहिए । मच्छर से बचने मच्छर दानी का उपयोग सबसे कारगर उपाय है ।खिडकियों मे जाली लगाना जिससे मच्छर घरो मे प्रवेश ना करे और पानी जमा ना होने दे। जंहा मच्छर अंडा देते है। बीईईटीओ व स्वास्थ्य सुपरवाइजर शहरी चरोदा सैय्यद असलम ने बताया कि डेगूं ,मलेरिया, फाइलेरिया, चिकन गुनिया जो मच्छर के काटने से फैलते है। इनकी प्रजाति अलग अलग होती है। इनसे बचने के लिए मच्छरदानी का उपयोग सबसे ज्यादा बडा उपाय है। जिला मलेरिया अधिकारी डा सी बी एस बंजारे ने बताया कि वर्तमान समय मे शासन हर घर,स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों मे फाइलेरिया से बचने दवा खिलाने दल भेज रही है। वयस्कों को 3 गोली ,6 से 14वर्ष को 2 गोली ओर 2वर्ष से 5वर्ष तक को एक गोली खाने से साल भर सुरक्षित रख सकते है। बीईईटीओ सैय्यद असलम ने बताया कि वही इसके साथ कृमिनाशक दवा भी दी जा रही है उसका सेवन साल मे दोबार करना चाहिए । जिससे पेट मे पल रहे कृमि का नाश होता है शरीर विकास करता है कृमि शरीर मे रहता है तो अनिंद्रा, चिडचिडापन, अरूचि ओर खून की कमी होती है सभी से अपील है कि दल से दवा प्राप्त कर हांथी पांव से बचाव ओर कृमिनाशक मे सहयोग करे कार्यक्रम मे मेडिकल आफिसर डा कीर्ति तिर्की ,डा आयशा परवीन, सीपीएम चरोदा विवेक मिंज महिला सुपरवाइजर श्रीमती आर विशवास, मीरा साहू मलेरिया निरीक्षक जी मोहन राव ,कमल तिवारी ,समरेश पटैरिया ,एम जार्ज , सभी स्वास्थ्य संयोजक पुरूष व महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका ,मितानीन का सहयोग रहा है।
चरोदा भिलाई-3 में फाइलेरिया उन्मूलन के लिये 248 दल बनाये गये
