रायपुर—पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्रवण सिह ठाकुर ने 22 वर्षों तक संस्था एवं संघ के विभिन्न पदों पर कार्य कर कर्मचारी हित में एक कीर्तिमान स्थापित किया।
श्रवण सिंह ठाकुर ने बताया कि वह 1 जनवरी 2001 से कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष के पद से कर्मचारी हित का कार्य करना प्रारंभ किया । 2002 से 2005 तक विश्वविद्यालय सभा का प्रथम एवं अंतिम निर्वाचित कुल सांसद बनने का उन्हे सौभाग्य प्राप्त हुआ। इन 3 वर्षों में विश्वविद्यालय सभा के सलाहकार होने के नाते संस्था एवं कर्मचारी हित में 36 पत्र राज भवन एवं राज्य शासन को दिया जिसमें शिक्षकों की भर्ती में छत्तीसगढ़ के योग्य एवं प्रतिभावान उम्मीदवारों की योग्यता को प्रथम प्राथमिकता देने, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विश्वविद्यालय की भर्तियों में प्राथमिकता देने की मांग पर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी का आशीर्वाद मिला। प्रदेश के प्रथम राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय ने हमारी मांगों को सही माना। अपराधिक प्रकरण वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों में भेदभाव , भवन निर्माण की गुणवत्ता में कमीशन खोरी की जांच , शिक्षा में गुणवत्ता जैसे अनेक प्रकरणों पर राज्य शासन से शिकायत कर जांच करने एवं दोषियों को दंडित करने की मांग पर राज्य शासन ने 2005 में विश्वविद्यालय सभा को ही ,,,,,ना रहेगी बांस और न बजेगी बांसुरी ,,,,,की तर्ज पर समाप्त कर दिया ।
2005 से 2006 तक संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया इसके साथ 2005 से 2008 तक अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ में एग्जीक्यूटिव मेंबर के रूप में रहकर आंध्र प्रदेश एवं दिल्ली जैसे शहरों में जाकर अपने छत्तीसगढ़ राज्य के विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व कर समस्याओं के निदान हेतु प्रयास किया 2009 में फिर से संघ के अध्यक्ष एवम सचिव के रूप में प्रदीप कुमार मिश्र के साथ मिलकर 5/9/2017 तक संस्था, कर्मचारी हित में राजभवन एवं राज्य शासन को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सैकड़ों पत्र देकर विश्वविद्यालय में उपजे भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया एवं संस्था को सजाने का काम किया । विश्व विद्यालय के विकास एवं संघ की हड़ताल को देखकर 2016 में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में आने से इंकार कर दिया जिससे प्रदेश के पूर्व राज्यपाल एवं कुलाधिपति टंडन जी ने 10.08.2016को 22 वे दीक्षांत समारोह का बहिष्कार कर दिया, तब डॉक्टर रमन सिंह द्वारा कुलपति का सम्मान करते हुए दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति जी के स्थान पर अध्यक्षता कर दीक्षांत समारोह को संपन्न कराया। संघ की शिकायतों पर ही विश्वविद्यालय प्रशासनिक व्यवस्था को ठीक करने आईएएस अफसर को पहली बार कुलसचिव बनाया। नेक की टीम के आगमन पर संस्था की कमियों को छिपाकर और अपने विश्वविद्यालय को ए प्लस अथवा ए डबल प्लस बनाने के लिए मुखिया के निर्देश का सम्मान करते हुए विश्वविद्यालय का गुणगान किया । दिसम्बर 2016 में कर्मचारी मितव्यी सहकारी समिति का अध्यक्ष पद धारण कर 5 वर्षों तक सोसाइटी का कार्य किया। 2017 से सलाहकार पद पर कार्य करते हुए पुनः 2019 में संघ के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण कर कोरोना काल में संस्था, कर्मचारी हित में सैकड़ों पत्र न्याय तंत्र , लोकतंत्र, प्रशासनिक तंत्र के मुखिया होने के नाते प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति जी, मुख्यमंत्री जी, उच्च शिक्षा मंत्री जी एवं मुख्य सचिव जी को देकर संस्था, राज्य शासन एवं राज भवन की अतीत एवं वर्तमान विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराते हुए भविष्य में पंडित रविशंकर शुक्ल जैसे महान पुरुष के नाम से स्थापित प्रदेश के सबसे प्राचीन एवं विश्वसनीय विश्वविद्यालय को ए प्लस अथवा ए प्लस ग्रेड अथवा वर्ड क्लास यूनिवर्सिटी बनाने का आग्रह किया हैं । कर्मचारी मांगों को पूरा कराने विश्वविद्यालय में तीन बार हड़ताल किए एवं मांगों को पूरा कराने में सफल रहे 25/9/2019 से 22/8/2022 तक श्रवण सिंह ठाकुर और पुनः प्रदीप कुमार मिश्र सचिव की जय बीरू की यह अहम जोड़ी ने सातवे वेतनमान और उसके एरियर्स लेने में हड़ताल करके सफल हुए ।
मिश्रा ठाकुर द्वय ने मिलकर संघ का चुनाव 22 अगस्त 2022 को कराए और नए पदाधिकारियों का गठन कराया एवं कर्मचारी एवं संस्था हित में अच्छे कार्य करने का सलाह दिया।

