न्याय के लिए 10 वर्षो से दर-दर भटकता किसान,शासन प्रशासन द्वारा कहीं कोई सुनवाई नहीं,गरियाबंद जिले के अधिकारी कुंभकर्णी निद्रा में,अफसर शाही के आगे मंत्रियों की भी नही चलती

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद । गरियाबंद जिले के छुरा तहसील अंतर्गत ग्राम रजनकटा के किसान खेमलाल यादव पिता लीलाधर यादव न्याय पाने लगातार शासन प्रशासन का द्वार खटखटा रहा है। किंतु कोई सुनने वाला नहीं है। लगता है की सभी कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं ।खेमलाल यादव का ग्राम रजनकटा पटवारी हल्का नंबर 17 तहसील छुरा जिला गरियाबंद छत्तीसगढ़ में पैतृक भूमि है जिस पर उसका कब्जा व भूमि उनके होने का प्रमाण है। किंतु बंदोबस्त द्वारा चालबाजी करते हुए उस भूमि से उसका नाम हटा दिया गया ।बंदोबस्त त्रुटि सुधार हेतु सन 2010 में कृषक द्वारा तहसील कार्यालय छुरा में आवेदन प्रस्तुत कर नाम जोड़ने कहा गया ।लेकिन 11 वर्ष की न्यायालयीन प्रक्रिया के पश्चात सन 2021 में तहसील कार्यालय छुरा द्वारा रिकॉर्ड अद्यतन कर आदेश जारी हुआ ,किंतु 1 साल 5 माह बाद बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड अद्यतन नहीं हुआ ।इस बीच तहसील कार्यालय छुरा द्वारा उस भूमि से लगे किसान के नाम पर सीमांकन कर खेमलाल यादव को उसके पैतृक भूमि से जिसका सारा प्रमाण उनके होने का है बेदखल करने का कुत्सित प्रयास कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है ।
इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व छुरा, जिलाधीश गरियाबंद, आयुक्त संभाग रायपुर एवं मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन तथा विधायक विधानसभा राजिम, प्रभारी मंत्री जिला गरियाबंद, राजस्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, कृषि मंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं पंचायत मंत्री छत्तीसगढ़ शासन को आवेदन देकर रिकॉर्ड अद्यतन करा कर न्याय प्रदान करने की याचना की गई किंतु कहीं से अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
जिलाधीश गरियाबंद को सामान्य आवेदन दो बार एवं जन चौपाल में दो बार आवेदन देकर न्याय की याचना की गई किंतु कहीं से भी आज पर्यंत कोई कार्यवाही नहीं हुई है 20 जून 2022 को अवर सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन छत्तीसगढ़ शासन ने कलेक्टर गरियाबंद को इस संबंध में पत्र लिखकर आवश्यक कार्यवाही हेतु कहा गया जिस पर भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई लगता है राजस्व विभाग खासकर गरियाबंद जिले के सभी अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। किसान मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजर रहा है ऐसी स्थिति में उसके पास अब न्यायालय की शरण में जाना ही एकमात्र उपाय रह गया है।

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