देवमाता अस्पताल बना लूट खसोट का अड्डा स्वास्थ्य सचिव से शिकायत

रोशन अवस्थी@देवभोग। नर्सिंग एक्ट के तमाम नियम कानून के धता दिखाकर देवभोग मुख्यालय मैं संचालित देवमाता निजी अस्पताल इन दिनों झोलाछाप डॉक्टर के जरिए लूट घसोट का अड्डा बना हुआ है। ब्लड से लेकर सोनोग्राफी तक के लिए मोटी रकम वसूली किया जाता है। उल्लेखनीय है कि देवमाता हॉस्पिटल में बसना से किराए के एमबीबीएस डॉक्टर संजय चौधरी को रखा गया है। लेकिन यह डॉक्टर अधिकतर अस्पताल में मौजूद नहीं होते और उनके जगह अस्पताल के बिना डिग्रीधारी कथित डॉक्टर दयाराम बेनर्जी द्वारा चेकअप से लेकर इलाज किया जाता है देवमाता अस्पताल से इलाज कर निकले कुछ मरीजों के अनुसार सोनोग्राफी के लिए 11 सौ, ब्लड चेकअप के लिए लगभग डेढ़ हजार और एक्सरे के लिए 400 से अधिक खर्चा आता है। इसके अलावा कथित झोलाछाप डॉक्टर बैनर्जी द्वारा एमबीबीएस डॉक्टर की आड़ में हानिकारक दवाई भी अपने पर्ची मैं लिखा जाता है। जानकारों की माने तो झोलाछाप डॉक्टर द्वारा एनआरएक्स की दवाई लिखते हैं। जबकि यह दवाई स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के चलते प्रतिबंध है। बावजूद इसके बेधड़क बिना डिग्रीधारी डॉक्टर इलाज साथ साथ बिना मापदंड वाले अस्पताल संचालित कर रहे है। जिससे सीएचएमओ भली-भांति अवगत है लेकिन अफसोस की बात है आज तक इस देवमाता अस्पताल के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो पाया जबकि गांव गांव के भोले भाले मरीजों को हाई डोज इलाज के झांसे में लेकर अपना गोरखधंधा वर्षों से संचालित कर रहे हैं। मतलब मरीजों की जिंदगी को खतरे में डालने के साथ-साथ आर्थिक लूट भी मचाया जा रहा है। शायद यही वजह है कि इस अस्पताल की शिकायत अब सीधा स्वास्थ्य सचिव से कर कार्यवाही की मांग करने की तैयारी हो रही है।

सीसीटीवी के बिना सोनोग्राफी _: सबसे खास बात यह है कि सोनोग्राफी के लिए लंबी चौड़ी गाइडलाइन है। जिनमें से सोनोग्राफी रूम पर सीसीटीवी लगाने के साथ रजिस्टर मेंटेन करने का भी नियम है। लेकिन देवमाता अस्पताल के सोनोग्राफी कक्ष पर सीसीटीवी नहीं है। ऐसे में लिंग परीक्षण करने की संभावना भी जताई जा रही है। शायद यही वजह है कि महीनों से सोनोग्राफी कक्ष पर सीसीटीवी नहीं लगाया गया। जिसकी खबर ना सीएमओ को है और स्थानीय स्वास्थ अमला की ओर से जांच पड़ताल होती है। मतलब पैसा कमाने की लालसा नर्सिंग नियमों को दरकिनार करते कानूनी अपराध करने से भी पीछे नहीं है। हालांकि इसका कारण स्वास्थ अधिकारियो की संरक्षण को माना जाता है। तभी वर्षों से देवमाता हॉस्पिटल के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो पाया।

लैब टेक्नीशियन के बिना जांच _: नियमानुसार ब्लड मूत्र सहित अन्य प्रकार के जांच के लिए लैब टेक्नीशियन का होना अनिवार्य माना जाता है। ताकि विधिवत जांच कर सहीं रिपोर्ट मिले। लेकिन देवमाता हॉस्पिटल में बिना लैब टेक्नीशियन के ब्लड मूत्र सहित कई प्रकार जांच किया जाता है।जिसकी पुष्टि करना भी मुश्किल बताते हैं क्योंकि जो अस्पताल में मलेरिया पॉजिटिव बताते हैं। वह उड़ीसा के जांच पर निगेटिव रिपोर्ट मिलती है । ऐसे में कई मरीज बिना पुष्टि किए रिपोर्ट के आधार पर झोलाछाप डॉक्टर की हानिकारक इलाज लेकर मौत को आमंत्रित करते हैं और अक्सर यह देवमाता अस्पताल में देखने को मिलता है। जिसे लेकर मरीज और अस्पताल प्रबंधन के बीच कईयों बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिला।

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