छुरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत गायडबरी के सचिव उड़ा रहे है सूचना के अधिकार अधिनियम की खुलेआम धज्जियां,लगभग 15 सालो से अंगद की तरह पैर जमाकर शासन की राशि में मनमानी करने वाले जिम्मेदार ने बना लिया खुद का कानून

परमेश्वर कुमार साहू @गरियाबंद। पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए बनाई गई सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 कानून केवल मखौल बनकर रह गया है।जिम्मेदार इस नियम का न तो पालन कर रहे है है और न आवेदको को समय सीमा पर जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।वही जिन ज़िम्मेदारो को इस नियम को पालन कराने की जिम्मेदारी है वे भी नियमो की खुलेआम धज्जियां उड़ाने में लगा है।जिससे साफ जाहिर है की नियमो को ठेंगा दिखाने में सभी जिम्मेदार एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे है।जिसके चलते छुरा ब्लॉक में भ्रष्टाचारियों और लापरवाहो को बचाने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी देने में टाल मटोल करने से भी बाज नहीं आ रहे

कुछ इस तरह का मामला गरियाबंद जिले के आदिवासी ब्लॉक छुरा में देखने को मिल रहा है। जंहा ब्लॉक के ग्राम पंचायत गायडबरी के जनसूचना अधिकारी द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर खुद का कानून बनाने में लगे है।बता दे की ग्राम पंचायत गायडबरी में विभिन्न बिंदुओं को लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगा गया था।लेकिन जन सूचना अधिकारी व सचिव हरिश्चंद्र ध्रुव द्वारा समय सीमा में किसी भी प्रकार से पत्राचार नही किया।जबकि समय सीमा पश्चात जारी किए पत्र में गुमराह पूर्वक जवाब जारी करते हुए मांगी गई जानकारी को लगभग 70 हजार पेज होना बताते हुए 2 रूपए प्रति पेज के हिसाब से शुल्क जमा करने पत्र लिखा है।अब सवाल ये है क्या शासन प्रशासन गायडबरी पंचायत में इतने मेहरबान तो नही की इस पंचायत को करोड़ो अरबों का बजट दे रहा हो, की सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी लगभग 70 हजार पेज में हो।ये बात उनके ही विभाग के अधिकारियों,कर्मचारियों सहित किसी के भी गले से नही उतर रहा है।जबकि बताना लाजमी होगा की ग्राम पंचायत गायडबरी में पदस्थ सचिव हरिश्चंद्र ध्रुव लगभग 15 सालो से एक ही जगह अंगद की तरह पैर जमाए हुए है।विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ अच्छी पकड़ होने के चलते आज तक इसका तबादला नही हो पाया है।जिसका यह सचिव जमकर फायदा उठा रहा है और शासन से निर्माण व विकास कार्यों के लिए प्राप्त राशियों में जमकर हेराफेरी करते हुए मनमानी कर राशि का दुरुपयोग कर बंदरबाट करने में लगा है।आज भी इस पंचायत में कई विकास व निर्माण कार्य सालो से अधर में पड़े हुए है।वही यहा के महिला सरपंच पूरी तरह से निष्क्रिय है।जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।ग्राम पंचायत में कई ऐसे अनियमितता है जिसको लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगा गया था।लेकिन सचिव द्वारा नियमो के विपरित कार्य करते हुए इस अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाने में लगे है।वही इस मामले को लेकर प्रथम अपीलीय अधिकारी व जनपद सीईओ छुरा के समक्ष अपील प्रस्तुत किया गया था। जंहा दोनो पक्षों को सुना गया।लेकिन फिलहाल किसी भी प्रकार से अभी निर्देश नही दिया गया है।अब देखना ये होगा की जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्मचारी को नियम का पालन करवाएंगे या फिर लापरवाहों को बचाने का प्रयास।

वही इस मामले को लेकर ग्राम पंचायत गायडबरी के सचिव हरिश्चंद्र ध्रुव को उनका पक्ष जानने कइयों बार फोन किया गया।लेकिन उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।

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