परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद
महिलाओ को ऊपर उठाने की शासन प्रशासन जितने भी कोशिश कर ले पर उनके घर परिवार और उनके पति उठने ही नही दे रहे है।राज्य एंव जिला प्रशासन द्वारा भले ही यह आदेश निकाला गया हो की महिला जनप्रतिनिधी के कार्य क्षेत्र में उनके घर परिवार वाले हस्तक्षेप नहीं करेंगे,पर वह आदेश केवल दिखावा ही साबित हो रहे है।जिला,जनपद एव ग्राम पंचायतो में हमेशा से ही उनके पतियों का दबदबा और रौब देखने को मिलता है और उनके सारे कार्य का संचालन उनके पति ही करता है।
आदिवासी विकासखंड छुरा के कई ग्राम पंचायतों में इस तरह देखने को मिलता है। यही हाल ग्राम पंचायत गायडबरी में भी देखने को मिला। जंहा मौके पर पहुंची मीडिया की टीम को सारे कार्य महिला सरपंच के जगह उनके पति करते नजर आए।नियमो की धज्जियां उड़ाते हुए सरपंच पति बकायदा अपनी सरपंच पत्नी के कुर्सी पर बैठ कागजी काम करते नजर आए।जिससे शासकीय दस्तावेजों और शासकीय कार्यों में सचिव और सरपंच पति की मिलीभगत से आर्थिक अनियमितता हाेना लाजमी है।देखा जाए तो सरपंच पति का दबदबा होने की वजह से गांव के भोले भाले ग्रामीण इसके खिलाफ आवाज नही उठा पाते ।जिसके फायदा दोनो हाथो से उठा रहे है।विकासखंड छुरा की जनपद पंचायत ऐसे ही कई मामले को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है।हालांकि यह की मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वंय एक महिला है और महिलाओ को उनका अधिकार और कर्तव्य को बता पाने में सक्षम नजर नही आ रहे है।जिसके चलते महिलाओ को आत्मनिर्भर बनाने वाली सरकार की सपना चकनाचूर हो रहा है।
वही वनांचल ग्राम पंचायत गायडबरी में विकास कार्य थम सा गया।जिसमे सालो से जमे ग्राम पंचायत सचिव की उदासीनता भी साफ नजर आ रहा है। कई निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।वही महिला सरपंच की निष्क्रियता के चलते ग्रामीणों में खासे नाराजगी भी है।तो दूसरे ओर शासन द्वारा विभिन्न विकास व निर्माण कार्यों के लिए प्राप्त राशि का धरातल में कोई कार्य ठीक से दिखाई नही दे रहे है। कही ऐसा तो नहीं की इस राशि का दुरुपयोग हो रहा हो? इस पंचायत के कुछ मामलो को लेकर पहले भी खबर प्रकाशन किया गया था।जिसके बाद तिलमिलाए सरपंच पति सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकार पर एसटीएसी के तहत झूठा प्रकरण दर्ज कराने की बात भी अन्य मीडियाकर्मियों के पास कह डाले।आपको बता दे की गरियाबंद जिले का यह छुरा ब्लॉक आदिवासी बाहुल्य ब्लॉक है।जिसके कारण पंचायत चुनावों में इन्हे आरक्षण है और जब कोई भी लापरवाही,अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला मीडिया द्वारा कवरेज किया जाता है।तो कुछ सरपंच एसटीएससी कानून का दुरपयोग करने से भी बाज नहीं आते है और संघ का ताकत दिखाने से भी गुरेज नहीं करते।जबकि ब्लॉक के मिडियाकर्मी सच को उजागर करने निस्वार्थ भाव से अपना कार्य बखूबी निभा रहे है और हमेशा ब्लॉक के विकास के लिए तत्परता के साथ यहा की समस्याओं सहित विभिन्न मुद्दों को उठाने में हर संभव प्रयास कर रहे है।लेकिन कुछ लोग अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करने और दुश्मनी निकालने आदिवासी सरपंचों को आड़ में लेकर पत्रकारों के ऊपर एसटीएससी के झूठे प्रकरण भी पहले दर्ज करा चुके है और आज भी षड्यंत्र करने से भी बाज नहीं आ रहे है। इन विषम परिस्थितियों में मीडिया अपना कार्य कर सच को उजागर कर रहे और हमेशा सच को आइना दिखाते रहेंगे।
वही इस मामले को लेकर जनपद पंचायत छुरा के सीईओ रुचि शर्मा को फोन किया गया।लेकिन उन्होंने मीटिंग में होने की बात कही।
