भुवन पटेल@कवर्धा। जिला अस्पताल , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्रथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अस्पतालों में कई दिनों से मेटफॉर्मिन ,फोलिक एसिड , शुगर , बी पी की दवा नहीं है। चिकित्सकों की ओर से बाहर की दवाएं धड़ल्ले से लिखी जा रही है। वहीं अस्पताल प्रशासन की ओर से सभी दवाएं उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है।
गंभीर मरीजों को तो बाहर रेफर किया ही जाता है, अब चिकित्सकों की ओर से अस्पताल से बाहर की दवा लिखी जाने से जिला अस्पताल सिर्फ परामर्श केंद्र बनकर रह गया है। ओपीडी में चिकित्सक पर्चे पर दवा तो लिख रहे हैं, लेकिन वितरण काउंटर पर दवाएं नहीं मिल रही हैं। इस समय में अस्पताल रोजाना सैकड़ों मरीजों की ओपीडी चल रही है। इसमें अधिकतर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हैं। इस समय गर्मी अधिक होने के कारण कई प्रकार की समस्या हो रही है। इमरजेंसी के लिए भी दवाएं नहीं हैं। यहां तक कि मल्टी-विटामिन व कैल्शियम की टेबलेट भी पिछले कई महीने से खत्म हैं।
चिकित्सकों की ओर से पर्चे पर दवा तो लिख दी जा रही है, लेकिन काउंटर पर जाने के बाद बैठे लोगों द्वारा यह कह दिया जाता है कि अस्पताल में यह दवा नहीं है।
सफेद हाथी साबित हो रहा जिला अस्पताल
कबीरधाम जिला अस्पताल हमेशा सुर्खियों में रहता है शुरुआत से ही कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है कभी चिकित्सक की कमी तो कभी दवाई की जबकि यहां पर सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होना चाहिए लेकिन नही हो पा रहा है । यहां पर सभी प्रकार की दावे केवल खोखला नजर आता है ।

अप्रैल कुल नही अप्रैल फूल
छः अप्रैल को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव के द्वारा पौधा रोपण पश्चात जिला अस्पताल का निरीक्षण किया गया उन्हें वहां पर उपलब्ध सुविधाओं के बारे में अस्पताल प्रबंधन ने बताया जिस पर मंत्री जी ने अस्पताल प्रबंधन की पीठ थपथपाई थी लेकिन उन्हें वहां पर व्यप्त समस्याओं को नही बताया गया जिसके कारण आज मरीजों को सामन्य बीमारियों के दवाई उपलब्ध नही हो रहा है जो गंभीर समस्या है साथ ही लोगो के सेहत के साथ खिड़वाल किया जा रहा है ।
