आदिवासी बालक छात्रावास तौरेंगा के अधीक्षक एक फिर छात्रावास से मिले गायब,शासन के कार्यों और बच्चो के प्रति नही दिखा रहे है दिलचस्पी,बरत रहे है भारी लापरवाही

आदिवासी बालक छात्रावास तौरेंगा के अधीक्षक एक फिर छात्रावास से मिले गायब,शासन के कार्यों और बच्चो के प्रति नही दिखा रहे है दिलचस्पी,बरत रहे है भारी लापरवाही

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद,आदिवासी बाहुल्य ब्लॉक छुरा में छात्रावास अधीक्षको की मनमानी और भर्राशाही उच्च अधिकारियों के सरंक्षण में खूब फल फूल रहा है।नतीजन छात्रावास में अधीक्षक न तो समय पर ड्यूटी में आते है और न ही रात में रुकते है।जब मर्जी होती है चले जाते है और आ जाते है।

ऐसा ही मामला ब्लॉक के तौरेंगा आदिवासी बालक छात्रावास का है। जंहा अधीक्षक नातून ध्रुव हमेशा छात्रावास से गायब रहता है।इस मामले को लेकर न्यूज 24 कैरेट ने पहले भी पड़ताल कर खबर प्रकाशित किया था।जिसके बाद गरियाबंद कलेक्टर ने खबर संज्ञान में लेकर जांच के आदेश संबंधित विभाग को दिए थे।लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जांच के नाम पर पर केवल खानापूर्ति कर अपने लापरवाह कर्मचारी को बचाने का प्रयास किया।वही आज 10.30 बजे एक बार फिर तौरेंगा आदिवासी बालक छात्रावास का पड़ताल किया गया।जंहा छात्रावास अधीक्षक नातुन ध्रुव हमेशा की तरह नदारद मिले।जब इस बारे में बच्चो और बाकी स्टाफ से जानकारी लिया गया तो बताया की अधीक्षक कल दोपहर को गए है तो ड्यूटी पर ही नही आए है और आज भी सुबह से नही आए है।बता दे की इस छात्रवास का अधीक्षक कभी भी समय पर ड्यूटी में नही रहता और इधर उधर घूमते रहता है और न ही कभी भी बच्चो के बीच रात को रुकता है।जबकि छात्रवास अधीक्षको को 24 घंटा ड्यूटी करना है और रात को छात्रावास में रुकना है।क्योंकि शासन द्वारा इन्हे बच्चो की सुरक्षा सहित पूरी देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है।जिसके लिए शासन द्वारा लाखो रुपए की राशि खर्च किया जा रहा है।लेकिन तौरेंगा के अधीक्षक द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही बरत बच्चो की जान जोखिम में डाल रहा है।जो हमेशा दिन और रात को बच्चो को छात्रावास में छोड़ घर चले जाते है।इस अधीक्षक को घर का मोह इतना है की बच्चो और शासन के कार्यों से इन्हे कोई लगाव नहीं है।वही बच्चो के राशन में भी डकैती कर रूखा सूखा भोजन भी दिया जा रहा है।जिसके चलते आदिवासी बच्चो के लिए बनाई गई योजना का सही लाभ बच्चो को नही मिल पा रहा है।वही पड़ताल के दौरान छात्रवास में पदस्थ कर्मचारी देशी महुवा शराब के रंग में भी नजर आए और जब इन शराबी कर्मचारी से पूछा गया तो बताया की एक एक पैक बस महुवा वाला पिए है।
वही संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कभी भी मीडिया का फोन नही उठाते।इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की इसकी जानकारी उच्च विभाग को न हो।उच्च अधिकारियों के सह पर ही इस तरह की लापरवाही का खेल चल रहा है।कहने को तो मॉनिटरिंग के लिए अधिकारी भी नियुक्त है।लेकिन कभी भी किसी ने इस ओर झांकना तक उचित नहीं समझा।मॉनिटरिंग के नाम पर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा केवल शासन की राशि का डीजल पेट्रोल बर्बाद कर केवल रास्ता नापने का बस ही काम किया जा रहा है।बल्कि हकीकत यही है की इन जिम्मेदारों को शासन की कार्यों के प्रति न तो गंभीर है और न ही दिलचस्पी।क्योंकि इनका वेतन तो इन्हे समय पर मिल जा रहा है।अब सवाल ये है की इन अधिकारियों को शासन अच्छी वेतन और सारी सुविधाए किस काम के लिए दे रहा है।

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