छुरा:- छग और शायद भारतीय इतिहास में पहली बार देखा जा रहा कि कर्मचारी जगत को स्वयं के महंगाई भत्ते को लेकर आन्दोलन के लिए विवश होना पड़ रहा है।विदित हो विगत तीन वर्षों से डी ए से वंचित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर महंगाई भत्ता संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 11 से 13 अप्रैल तक पूर्णतः तालाबंदी करते हुए आन्दोलन में जाने का रास्ता अपनाया है।उक्ताशय की जानकारी देते हुए छग विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ जिला गरियाबंद के जिलाध्यक्ष मंगलमूर्ति ने बताया कि सरकार के उदासीन रवैए से आक्रोशित तीन लाख कर्मचारियों एवं एक लाख पेंशनरों को राहत की आवश्यकता है। महंगाई भत्ते की मांग को लेकर मुखर विभिन्न शिक्षक संगठनों, व्याख्याता संघ,लिपिक वर्गीय, तृतीय वर्ग, स्वास्थ्य एवं वनविभाग सहित करीब 32 कर्मचारी संगठनों ने महंगाई भत्ता संघर्ष मोर्चा का समर्थन किया है।इस आशय की जानकारी देते हुए मंगलमूर्ति ने कहा है कि वर्तमान में केन्द्र सरकार तथा कुछ राज्यों के कर्मचारियों को 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्रदान किया जा रहा है जबकि छग के कर्मचारी मात्र 17 प्रतिशत के साथ 17 प्रतिशत पीछे चल रहें हैं।वहीं सभी राज्यों में सातवें वेतनमान के आधार पर गृह भाड़ा प्रदान किया जा रहा है छग में इसमें भी सुधार की जरूरत है जिसकी मांग लगातार की जा रही है किन्तु शासन की उदासीनता के चलते कर्मचारियों को आन्दोलन के लिए विवश होना पड़ रहा है। आगे मंगलमूर्ति ने बताया कि महंगाई भत्ता संघर्ष मोर्चा के निर्देशानुसार जिला गरियाबंद में आन्दोलन की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से समस्त घटक संघों के जिला प्रभारियों की आवश्यक बैठक रविवार दोपहर को छुरा में आहुत की गई है।मंगलमूर्ति ने जिला गरियाबंद के सभी कर्मचारियों से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए अधिकाधिक संख्या में आन्दोलन में शामिल होने की अपील करते हुए सफलता की कामना की है।
