स्कूल समय में नदारद मिले प्रिंसिपल सहित स्कूल के शिक्षक,स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा स्कूल खुलने व बंद होने के निर्धारित समयावधि के पहले हायर सेकंडरी स्कूल लोहरसी में ताला लटकने के साथ ही स्कूल परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।

स्कूल समय में नदारद मिले प्रिंसिपल सहित स्कूल के शिक्षक,स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा स्कूल खुलने व बंद होने के निर्धारित समयावधि के पहले हायर सेकंडरी स्कूल लोहरसी में ताला लटकने के साथ ही स्कूल परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद,एक तरफ शासन द्वारा स्कूली बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए तरह तरह के जतन कर रहा है और लाखो करोड़ो की राशि खर्च कर रहा है।वही जिसके लिए शिक्षकों को अहम जिम्मेदारी दी गई है।जिसके लिए शासन इन शिक्षको को भारी भरकम वेतन के साथ सारी सुविधा दे रहा है।लेकिन ठसनबाज शिक्षको को बच्चो की शिक्षा और अपने कर्तव्यो के प्रति तनिक भी गंभीर नहीं है।जिसका ताजा मामला गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक के हायर सेकंडरी स्कूल लोहरसी में देखने को मिला। जहा स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा स्कूल खुलने व बंद होने के निर्धारित समयावधि के पहले हायर सेकंडरी स्कूल लोहरसी में ताला लटकने के साथ ही स्कूल परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।जबकि इसी परिसर में संचालित शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक शाला में बच्चे पढ़ाई करते और शिक्षक बच्चो को पढाते नजर आए।लेकिन हायर सेकंडरी में ताला लगा हुआ था और सभी शिक्षक स्कूल से 11बजे के पहले ही स्कूल में ताला लगाकर नदारद हो गए थे।जो इन लापरवाह शिक्षको की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

बताना लाजमी है की फिंगेश्वर विकासखंड का यह हायर सेकंडरी स्कूल का विवादो और लापरवाहियों से पुराना नाता है।जो अपनी कार्यप्रणाली को लेकर हमेशा से सुर्खियों में रहता है। यहा पदस्थ गैरजिम्मेदार शिक्षको को बच्चो की भविष्य सहित शासन के कार्यों और अपने दायित्वो के प्रति कोई सरोकार नही है।जिसके चलते इसकी ठसनबाजी साफ तौर पर दिखाई देती है।यही वजह है की समाज में सबसे ऊंचे दर्जा प्राप्त गुरु शब्द नाम कलंकित हो रहा है और शासन के लाखो प्रयास के बाद भी शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
जब इस मामले को लेकर हायर सेकंडरी स्कूल लोहरसी के प्राचार्य को फोन किया गया तो उन्होंने पहले तो ये कहा की शिक्षको का काम आ गया रहा होगा इसलिए सभी लोग जल्दी चले गए और खुद को छुट्टी में बताया।लेकिन कुछ समय बाद फिर फोन कर बताया की वे ओपन परीक्षा का केंद्राध्यक्ष है और परीक्षा ड्यूटी में है इसलिए स्कूल का प्रभार दूसरे शिक्षक के पास है।अब सवाल ये है की शासन के आदेशों के विपरित कार्य करने और उच्च विभाग के निर्देश के को ठेंगा दिखाने वाले इन लापरवाहो पर क्या कार्यवाही होगी या फिर जिले में शिक्षा विभाग में बैठे जिम्मेदार अधिकारी इनकी इस गलतियों पर पर्दा डाल मामले में लीपापोती करेगा।फिलहाल अब तक यही देखा गया की शिक्षा विभाग में शिक्षको के लापरवाही के सैकड़ों मामले में आज तक कोई ठोस कार्यवाही नही है।जिसके चलते लापरवाह शिक्षको के हौसले बुलंद है।सवाल ये भी है की आखिर सरकार इन शिक्षको को भारी भरकम वेतन और सारी सुविधाए किस काम के लिए देता है?

वही इस मामले को लेकर गरियाबंद डीईओ को लगातार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन उठना उचित नहीं समझा।

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