बच्चो की शिक्षा और शासन के कार्यों के प्रति नही है जरा भी गंभीर,पड़ताल करने पहुंचे मीडिया की टीम को दिया थाना की धमकी
परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद
शासन द्वारा शिक्षा को लेकर नित नए योजना बनाकर करोड़ो की राशि खर्च कर रहा है।जिसके लिए शिक्षकों के हाथो में महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है व बेहतर समाज और बच्चो की भविष्य निर्धारक के लिए शिक्षकों को अहम ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन शासन के तमाम प्रयासों के बावजूद स्कूलों में व्याप्त भर्राशाही का आलम सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। इसका अंदाजा छुरा ब्लॉक स्थित हाई स्कूल सांकरा से लगाया जा सकता है।शासन द्वारा इन शिक्षकों को भारी भरकम और सभी सुविधाए देने की बावजूद भी शिक्षको की ठसनबाजी बच्चो के भविष्य एव शिक्षा पर बड़ा बाधा उत्पन्न कर रहा है।

कुछ ऐसा ही मामला आदिवासी ब्लॉक छुरा के हाई स्कूल सांकरा का है। जंहा ठसनबाज महिला प्राचार्य नीना नारनवरे अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही बरतते हुए सालो से लेटलतीफी स्कूल पहुंच रहे है।उक्त प्राचार्य स्कूल मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर रायपुर से हॉफ डाउन करती है।जो हमेशा स्कूल खुलने के निर्धरित समय से 2 घंटा लेट 12 बजे पहुंचती है।जो इनकी दिनचर्या बन गया है। जिम्मेदार पद पर पदस्थ उक्त प्राचार्य द्वारा अपने दायित्वो के प्रति भारी लापरवाही बरतकर स्कूली बच्चों की भविष्य से खिलवाड़ कर रही है और कोई कोई दिन तो स्कूल ही नही आती।लेकिन मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार पद पर बैठे शिक्षा विभाग के आला अधिकारी शासन के वाहन में केवल डीजल पेट्रोल बर्बाद कर केवल रास्ता नापने बस का काम कर रहा है।आज तक इस लापरवाह प्राचार्य के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की गई।इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की प्राचार्य की लापरवाही की जानकारी जिम्मेदार उच्च अधिकारियों को न हो।
बता दे की इस मामले को लेकर मीडिया की टीम ने गुरुवार को सांकरा हाई स्कूल सांकरा का पड़ताल किया गया।जन्हा प्राचार्य नीना नारनवरे के साथ एक सहायक शिक्षक स्कूल से नदारद मिला।जब मामले की जानकारी लेने प्राचार्य को फोन किया गया तो बैंक काम का बहाना बनाने लगी और मिलकर बात करने की बात करने लगी।जबकि नियम के मुताबिक पहले शिक्षको को मुख्यालय आना है उसके बाद ही विभागीय काम करना है।लेकीन प्राचार्य स्कूल न आकर सीधा बैंक चली गई ,जो नियमो के विपरित है।जब दूसरे दिन फिर मीडिया की टीम पड़ताल करने पहुंची तो प्राचार्य स्कूल खुलने के निर्धारित टाइम से फिर दो घंटा लेट पहुंची।प्राचार्य की स्कूल हमेशा लेट पहुंचने और मनमानी की जानकारी लगातार स्थानीय लोगो से मिल रही थी।
लापरवाह प्राचार्य ने मीडियाकर्मियों को दिया थाना की धमकी,फिर देने लगे गोल मोल
शिक्षको की ठसनबाजी और मनमानी की खबरे तो आपने जरूर पढ़ा हो होगा।जो कोई नई बात नही है।फिर अगले दिन शुक्रवार को जैसे ही मीडिया की टीम सांकरा स्कूल पहुंचा तो प्राचार्य द्वारा अपने एक सहायक शिक्षक को एक पेपर में मीडिया कर्मियों का नाम व मोबाइल नंबर लिखने बोला और जब सवाल किया गया की नाम और नंबर क्यों लिखवा रही हो तो उन्होंने कहा की ज़रूरत पड़ता है और जैसे ही नाम व नंबर लिखा गया उसके बाद अपने सहायक शिक्षक को कहने लगे कि इन लोगो के खिलाफ थाना के लिए लेटर तैयार करो ,की ये लोग एक महिला प्राचार्य को परेशान कर रहा है और धमकी भी देने लगी।लेकिन जब मुद्दे पर सवाल किया गया तो सवालों के जवाब देने से बचती रही और कहने लगे की मै इतना दूर से आती हु,बहुत काम करती हु।वही उसके सहायक शिक्षक अपना गलती स्वीकारने में लगे थे। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की जिम्मेदार पद पर पदस्थ रहकर भी ये शिक्षक कितने लापरवाह है।गलती भी और सीनाजोरी की कहावत यहा देखने को मिला। यहा तक की गैरजिम्मेदार प्राचार्य उल्टा मीडिया को ही नसीहत देने में लगी थी।शिक्षक का दर्जा समाज में सबसे ऊपर माना गया है लेकिन इन लापरवाहो द्वारा इसके विपरित कार्य किया जा रहा है और शिक्षा के स्तर को गिराने का प्रयास कर रहे है।जिससे शासन की योजना को पलीता लग रहा है। अब सवाल ये है की शासन इन लापरावाहो को सारी सुविधा और भारी भरकम वेतन आखिर किस काम के लिए दे रहा है।क्योंकि जितनी बड़ी इनकी तनख्वाह उतनी बड़ी ठसनबाजी बन गई है।वही इस मामले को लेकर डीईओ से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नही हो पाया।
