वन कर्मी हड़ताल पर सरकार मांग पूरा करने में उदासीन…पंडरिया विधायक को दिए ज्ञापन

भुवन पटेल@कवर्धा। विगत चार दिनों से छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के समस्त कर्मचारियों ने बारह सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं। 21 मार्च से शुरू हुआ यह हड़ताल पता नहीं और कब तक चलेगा। जंगल की रखवाली करने वाला वन सेवक हड़ताल पर आ गए हैं और जंगल का सुध लेने वाला कोई नहीं है। अभी तक की जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा वन कर्मियों के हड़ताल को समाप्त करने उनकी मांगों के संबंध में विचार करने कोई भी प्रयास नहीं किया गया है।वन कर्मियों की मांगें बहुत पुरानी है वे अपनी जायज मांगों के लेकर 14 वर्षों से शासन प्रशासन के समक्ष धरना प्रदर्शन ,पत्राचार ,निवेदन और हड़ताल के माध्यम से हक की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। कुछ कर्मचारियों का मानना है कि छत्तीसगढ़ सरकार संवेदनशील सरकार है और वह जंगल के रखवालों की पीड़ा को जल्द ही समझ कर मांगों को पूरा करने की पहल करेंगे लेकिन पतझड़ के चलते अग्नि सीजन चल रहा है किंतु जंगलों की सुरक्षा की सुध लेने वाला कोई नहीं है।क्योंकि रक्षा करने वाले जिला मुख्यालय में सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे हुए हैं।

कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है वे हर हाल में अपनी मांगों को पूरा कराने की जिद पर अड़े हुए हैं। जिला अध्यक्ष परसराम चंद्राकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में बेहतर है और स्वयं मुख्यमंत्री राज्य को आर्थिक दृष्टि से समृद्ध और सशक्त होने की बात कई मंचों से कर चुके है। बता दें कि वन विभाग का स्थापना व्यय बहुत ही कम है तथा वन विभाग के कर्मचारी जंगलों की रखवाली के साथ-साथ तेंदूपत्ता तुड़ाई के समय संग्रहण में भी कार्य करते हैं ,सरकार को डीपो के माध्यम से आय भी मिलता है। फिर भी ना जाने वन कर्मियों की पीड़ा को गंभीरता से नहीं ले रही है। सभी वन कर्मचारी कटिबद्ध होकर इस आंदोलन में डटे हुए हैं और प्रतिदिन जिला मुख्यालय में पहुंचकर धरना प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

हड़ताल के चौथे दिन छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ जिला कबीरधाम द्वारा पंडरिया विधायक श्ममता चंद्राकर को मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्री मांगों को पूरा करने के लिए उनके कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। विधायक ने वन कर्मियों की मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष चर्चा करने का आश्वासन दिया।

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