अंतराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष: सरिता कुंजाम को परिजनों ने कभी भी दिव्यांगता का अहसास होने नहीं दिए news24carate में उन्ही की जुबानी पूरी रिपोर्ट

उतई ।प्रधान पाठिका सुश्री सरिता कुंजाम पिता बिसुन लाल कुंजाम माता श्रीमती रानी बाई कुंजाम हम दो भाई एवं चार बहने है मेरी जन्म 4 अक्टूबर 1982 में ग्रामोदय में हुआ जब मैं 6 साल की थी तभी से पोलियो से ग्रसित हो गई, मैं चलने फिरने में आज समर्थ हो गई जिससे जिससे मेरे माता पिता चिंता ग्रस्त हो गए। ये समय भी निकल गया और मेरी 7 वर्ष में स्कूल में दाखिला किया गया, मेरी बचपन बहुत ही कठिनाइयों से लेकर गुजरा और मुझे और मेरे माता पिता को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा मेरी बड़ी बहन जो कि मुझे गोद में उठाकर स्कूल ले जाया करती थी। मैं शाला में चुपचाप बैठी रहती थीं। मेरा प्राथमिक स्तर में बहुत कठिनाइयां हुई।
इस तरह समय के साथ मैं बैसाखी का सहरा ली ताकि शाला आने जाने में मुझे सुविधा हों सके मेरे माता – पिता द्वारा स्कूल के पास ही घर बनवाए ताकि स्कूल आ जा सकू। जब मुझे मैं कॉलेज की पढ़ाई शुरू की तो मेरे पिता जी मुझे लाया ले जाया किया करते हैं। इसी तरह में BA में ग्रेजुएट हुई, आगे क्या करना है कुछ समझ नहीं आया तब 2004 में शिक्षाकर्मी का फॉर्म भरी पर मुझे असफलता मिली में बहुत निराश हुईं परंतु सभी ने मुझे समझाया और आगे बढ़ने को प्रोत्साहित किया जिससे में फिर से 2005 में फार्म भरी और दोगुनी मेहनत कर सफलता प्राप्त हुईं।
14 जून 2005 में मेरा चयन एक शिक्षिका के रूप में शासकीय प्राथमिक शाला डुमरडीह में हुआ। प्रथम दिवस जब मैं शाला पहुंची तो में बहुत घबराई और सहमी हुई सी थी, परंतु शाला का स्टाफ बहुत ही सहयोगी रहे जिससे मुझे डरने की जरुरत नहीं पड़ी बच्चें भी मेरी कमियों के साथ स्वीकार किए, कभी भी मेरी दिव्यांगता का अहसास होने नहीं दिए, मुझे बहुत खुशी इन्ही बच्चों के माध्यम से मिली। और मुझे इस शाला में मेरी सहशिक्षिका श्री मति रीना चंदेल मैडम जो मेरा अच्छा बुरा, सुख-दुख, हर पल, हर दम पर मेरी साथ देनी वाली रही। बाहर की दुनिया में इसी दोस्त के माध्यम से देखने को मिली और सीखने का अवसर भी मिला। इस तरह चंदेल मैडम का स्थानांतरण हों गया। मैं दुखी हुई परन्तु का उनकी कमी का अहसास मेरी सहशिक्षिकाओ ने होने नहीं दिया। आज हर कदम पर रचना,देशमुख, विद्या और शारदा मैडम मेरे साथ रहे।
सन 2020,2021 में जब कोरोना काल आया तब परिस्थिति बहुत ही विकराल थी जिससे बच्चों में पढ़ाई का स्तर कम हो गया। परन्तु पढ़ाई की स्तर कम न हो इस लिए मोहल्ला क्लास लेने लगी, कुछ समय बाद मोहल्ला क्लास बंद हो गई कक्षा 5 वी के बच्चों को उनके पालकों की सहमति से घर पर ही बुलाकर पढ़ाई करने लगी कक्षा पांचवी के बच्चों की मेहनत और पढ़ाई की लगन को देख कर मैने भी बच्चों के प्रति वहीं मेहनत शुरू किया रोज 4 से 5 घंटे उनको शिक्षा दी जिसका परिणाम मुझे कक्षा पांचवी के चार बच्चों ने जवाहर नवोदय विद्यालय में चयन हुआ। मेरी 15 साल की नौकरी में प्रथम बार है कि मुझे यह खुशी मिली। यह मेरी पहली जीत हुई। और मुझे शिक्षा विभाग द्वारा उत्कृष्ट शिक्षिका 2021सम्मान में सम्मानित किया।
कुछ समय पश्चात मेरी पदोन्नति प्रधान पाठक के रूप में शास. प्राथमिक.शाला सेलुद में हुई, मैं प्राथमिक शाला डुमरडीह स्टाफ और बच्चों को में भूल नहीं पा रही हूं। क्योंकि मेरा मन यह स्कूल से आत्मीयता से जुड़ा हुआ। सब ने मुझे प्रोत्साहित कियाऔर आगे बढ़ाने को तत्पर किया। अब नए शाला में बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार रहूंगी। यह मेरी एक नई शुरुआत है।
मैं आशा करती हूं कि मेरा जीवन लोगों की सेवा,बच्चों को पढ़ाने लिखाने में आगे बढ़ाने एवं उन सब की मदद कर सकू जो मुझसे आशतित है “अपने लिए तो सब करते हैं परंतु मैं दूसरो के लिए करना चाहती हूं।” मे ईश्वर से यही कामना करती हूं कि सभी स्वस्थ एवं निरोग ऐश्वर्यवान रहे।
धन्यवाद।
सुश्री सरिता कुंजाम
प्रधान पाठका
शास.प्रथा.शाला सेलुद

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