रात को अंधेरा होते ही सक्रिय हो जाते है मुरुम माफिया, उत्तर पाटन में चल रहा है अवैध मुरुम उत्खनन का खेल, खनिज व राजस्व महकमा बेखबर


पाटन। पाटन क्षेत्र के चारो तरफ मुरुम माफियाओं द्वारा दिन-रात मुरुम की अवैध खनन किया जा रहा है। जिला खनिज विभाग तथा स्थानीय मुख्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों का भी इस तरफ ध्यान नही है। अब तो मुरुम माफियाओं द्वारा खुलेआम मुरुम का अवैध उत्खनन करते देखा जा सकता है।

उत्तर पाटन के अमेरी, करगा, गभरा, तर्रा, अमलीडीह, कोपेडीह , दक्षिण पाटन के असोगा, रानितराई , मध्य पाटन के धौराभाठा, राखी, लोहरसी सहित अन्य ग्रामो में मुरुम उत्खनन किया जा रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर पाटन के ग्राम गभरा, अमेरी, बटंग, खुड़मुड़ा तरफ ज्यादा मुरुम खनन की जानकारी है। वही मध्य पाटन में ग्राम ढौर में आदर्श गौठान जाने वाले मांर्ग पर जोरों से मुरुम का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। यहाँ पर दो चैन मशीन तथा चार हाइवा लगातार चल रही है। इसके अलावा ग्राम धौराभाठा में सुदामापुरी क्षेत्र में भी मुरुम का अवैध उत्खनन जोरो से चल रहा है । यहां पर भी एक बड़ा वाला चैन मशीन सहित आधा दर्जन हाइवा इस कार्य मे लगे है। इन पर नजर तो सबका का है लेकिन कार्रवाई नही होने से मुरुम माफियाओं के हौसला बढ़ रहा है।

खेत बनाने के नाम पर कर रहे एग्रीमेंट
मुरूम उत्खनन के लिए मुरूम माफियाओं के द्वारा किसानों के साथ उनके खेत को समतल व और गहरा बनाने के लिए एग्रीमेंट किया जाता है। बताया जाता है कि इस एग्रीमेंट में 3 फीट गहरा खोदने का किसानों के साथ एग्रीमेंट रहता है। लेकिन खनन करने वालो के द्वारा किसानों के खेत को 4 से लेकर 6 फीट तक की गहरा कर दिया जाता है । इसके बाद उसमें काली मिट्टी डालने के नाम पर सिर्फ ऊपरी परत ही काली मिट्टी की बिछा दी जाती है। जब किसान अपने खेत को देखता है तो वह ठगा सा महसूस करता है। मुरुम माफिया मुरूम लेकर अपना काम तो निकाल लेते हैं उसके बाद किसान को खेत में खेती के लिए परेशान होना पड़ता है।। बताया जाता है कि कुछ-कुछ किसान मुरूम खुदवाने के लिए पैसा भी लेते हैं ।

शासकीय कार्य के नाम पर खुदाई, पर बेच रहे है मुरुम
मुरूम खुदाई करने वालों के द्वारा बकायदा शासकीय कार्य पर मुरुम की सप्लाई किए जाने की बात कही जाती है। सड़क निर्माण के नाम पर ज्यादातर मुरूम खुदाई हो रही है । हाईवा में शासकीय कार्य पर प्रयुक्त वाहन भी लिखा हुआ पोस्टर दिख जाता है। लेकिन जब हमारे सूत्रों से पता लगाया गया तो पता चला कि शासकीय कार्य के नाम पर मुरुम की खुदाई तो जरूर हो रही है लेकिन शासकीय कार्य पर ना जाकर मुरूम को सीधे तौर पर बेच भी रहे हैं। अगर ग्रामीण इस पर पूछताछ कर करते हैं तो फिर सड़क निर्माण के लिए उपुयोग करने लगते है। कुछ दिन बाद फिर से वही पुराने ढर्रे शुरू हो जाता है।

शासकीय जमीन पर नजर गढ़ाए है माफिया
उत्तर पाटन क्षेत्र में ज्यादातर मुरुम की खुदाई अवैध रूप से हो रही है। इसमे ज्यादातर खनन रात के अंधेरे में किया जाता है। मुरुम माफियाओं द्वारा शसकीय जमीन को निशाना बनाया जा रहा है। रात में खुदाई कर परिवहन करवा लेते है।


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