लोकेश्वर सिन्हा
राजिम गरियबन्द छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। गांव की सीधी-साधी, कामकाजी महिला भी अब घर की चार दीवारी से निकलकर आत्मनिर्भर बन पैरों पर खड़े होकर अपने और परिवार के लिए कुछ करना चाहती है। उनके इन सपनों पूरा करने में छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं रामबाण सिद्ध हो रही है। समूह के माध्यम से महिलाएं लोन लेकर छोटे-बड़ें सभी प्रकार के घरेलू उद्योग संचालित कर आगे बढ़ रही है और अपने सपनों में एक नई उड़ाने भरने की ओर अग्रसर है। कृषि विज्ञान केन्द्र गरियाबंद के स्टाॅल में बिहान की महिला समूह द्वारा मशरूम उत्पादन का स्टाॅल लगाया गया है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक पौधरोपण विशेषज्ञ तुषार मिश्रा ने मशरूम उत्पादन करने की विधि को विस्तार से बताते हुए कहा कि इसमें 7 बाॅक्स होते है। पहले बक्से में अंकित चैकोर रेखा को काटे। बक्से के ऊपरी हिस्से को खुला रखे। दूसरे में चाकू की मदद से दर्षित पाॅलीथीन में एक्स आकार का कट बनाये एवं शीट को बिना फाड़े उसे खोल ले। जिससे पानी का छिड़काव किया जा सके। तीसरे में इसे 12-15 दिनों तक सुबह एवं शाम 15-30 मिली पानी का छिड़काव करते रहे, जब तक मशरूम के स्प्राउट्स दिखने न लगे। चौथा मशरूम पूरी तरीका से बाहर निकलने तक पानी का छिड़काव रोज जारी रखें। पांचवा उत्पादित मशरूम को बक्से की सतह से कांट ले एवं उपयोग करें। छठवां उपरोक्तानुसार चौथे एवं पांचवें क्रमों को दो और उत्पादन प्राप्त करने के लिए पुनरावृत्ति करें। तीन उत्पादन प्राप्त करने के बाद अंदर की सामग्री को जैविक कुड़ेदान में फेंके अथवा समान मात्रा में गोबर मिलाकर उसे खाद में परिवर्तित किया जा सकता है। इसमें पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है। यह सब्जी के रूप में बहुत स्वादिष्ट होता है। बाजार में इसकी मांग बहुत होती है। यह प्रतिपाव 90रूपये से 200रूपये तक में बिकती है। इस स्टाॅल में बहुत भीड़ देखी जा रही है। मेलार्थी मशरूम उत्पादन की विधि को जानने के लिए बहुत उत्सुक दिखाई दे रहे है। यह बहुत ही उपयोगी जानकारी है इसको कम उत्पादन से भी शुरू कर अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

