बिजली का टैरिफ बढ़ाने के लिये सीएसपीडीसीएल की याचिका का विरोध,,,घाटे के लिये कुप्रबंधन जिम्मेदार है जिसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिये

उतई(सतीश पारख)राज्य की बिजली आपूर्ति कं. सीएसपीडीसीएल की टैरिफ बढ़ाने संबंधी याचिका पर आज छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में जन सुनवाई हुई लाईसेंसी कं. ने 600 करोड़ से अधिक के पुराने घाटे की भरपाई के लिये बिजली टैरिफ में संशोधन करने के लिये गुजारिश किया है,
बिजली कं. की याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के अध्यक्ष एड. राजकुमार गुप्त ने आयोग को बताया कि कं. ने जिस घाटे का हवाला वह पुराने सालों का है चालू वर्ष में वर्तमान टैरिफ से ही कं. 3000 करोड़ से अधिक लाभ की स्थिति में है यदि वर्तमान टैरिफ को ही अगले साल भी लागू रखा जाये तब घाटे को पूरा करने के बाद भी कं. 2500 करोड़ के लाभ की स्थिति में रहेगी, मंच के अध्यक्ष ने पूर्व के घाटे के लिये कं. के कुप्रबंध को जिम्मेदार ठहराते हुए आयोग को बताया कि घाटे का प्रमुख कारण, लाईन लास और चोरी को नियंत्रित करने में कं. की नाकामी है, आंध्र में लाईन लास 10% है जबकि छत्तीसगढ़ में 18% कंपनी ने एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किया है जिसमें लाईन लास 15% के नीचे नियंत्रित रखने की बात है किंतु कंपनी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये जरा भी गंभीर नहीं है, मंच के अध्यक्ष ने आयोग को यह भी बताया कि कंपनी सरकारी विभागों से बिजली बिल का बकाया वसूल करने में भी नाकाम है राज्य के नगरीय निकायों पर ही 350 करोड़ से अधिक का बिल वसूल करना बाकी है राज्य के सभी सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के विभागों का बकाया जोड़ने पर लगभग 800 करोड़ रूपये वसूल करके कंपनी अपने घाटे की पूर्ति कर सकती है किंतु बकाया बिल की वसूली करने के बजाय कंपनी घाटे का बोध उपभोक्ताओं पर डालने की कोशिश कर रही है,
मंच के अध्यक्ष एड. राजकुमार गुप्त ने आयोग को यह भी बताया कि कंपनी सिर्फ 92% ही बिलिंग कर पाती है शेष 8% बिजली आपूर्ति के लिये बिलिंग नहीं कर पाती है, कंपनी बिलिंग की पूरी राशि भी वसूल नहीं कर पाती है 10% बिल वसूल ही नहीं हो पाता, पूरा बिलिंग और शत प्रतिशत वसूली करने से ही कंपनी करोड़ों का मुनाफा अर्जित कर सकती है, मंच के अध्यक्ष ने आयोग से बिजली टैरिफ बढ़ाने संबंधी लाईसेंसी कंपनी सीएसपीडीसीएल की याचिका खारिज करने का आग्रह किया है ।

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