राजिम माघी पुन्नी मेले: लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों में महकी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की खुशबू गोरेलाल बर्मन में समा बांधा

लोकेश्वर सिन्हा

राजिम गरियाबांद राजिम माघी पुन्नी मेला के मुख्यमंच पर लोकमंच कलाकार गोरेलाल बर्मन ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने तोला बंधव दाई से शुरुआत करते हुए एक से बढकर एक गीतों की प्रस्तुति दी। सांस्कृतिक मंच में पांचवे दिन सबसे पहले प्रभा यादव ने पंडवानी गायन की प्रस्तुति दी। उनके द्वारा महाभारत के कौरव, पांडव संवाद को मंच में प्रस्तुति दी। पंडवानी गायन के वैदिक शैली में प्रभा यादव की एक अलग अंदाज में प्रस्तुति दी, जिससे वे मंच पर अपनी अलग छाप छोड़ गई। इसके बाद दानीराम बंजारे ने गोपीचंद भजन की प्रस्तुति दी। ज्ञात हो कि गोपीचंद के भजन भरथरी की कहानी की एक पात्र है। गोपीचंद भजन मंच पर पहली बार आयोजित हुआ, जिसका दर्शको ने तालियांे से स्वागत किया। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक गायक और लोकमंच लोक श्रृंगार के निर्देशक गोरेलाल बर्मन ने अपने आवाज में छत्तीसगढ़ी गीता कीे बारिश कर दी। उन्होंने तोला बंधव दाई से शुरुआत करते हुए एक से बढकर एक गीतों गाए। पंथी नृत्य में चरण मनाव गुरूघासीदास… गायन के माध्यम से गुरूघासीदासजी का वंदना किया। जय बोलो छत्तीसगढ़….. मोर नाव के गोदना गोदाले तोर हाथ म…. इस गीत में मंच पर धुम मचा दिया। दर्शक इन गानों में झूमने लगे। गीतो की लगातार मनमोहक प्रस्तुति में मोला बइहा बना के छोड़ देबे का… आमा के डारा ल हलाओ कैसे…. इसी के साथ सुवा नृत्य और राउत नाचा की प्रस्तुति देकर दोहा भी पढ़े। आगे ते मोला मोहनी डारे और वर्तमान में रिलीज हुई़ कोसा के साड़ी पहिनाहूं तोला ओ… की प्रस्तुति ने समा बांधे रखा। मंच पर उनकी अंतिम प्रस्तुति भाजी तोड़े बर आबे मोर गांव के ऊनहारी म… के गीत को सुन दर्शक भी नाचने लगे। कार्यक्रम का संचालन पुरूषोत्तम चंद्राकर, निरंजन साहू, मनोज सेन, रूपा साहू ने किया। अंत में कलाकारों का सम्मान स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया।

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