माघ पूर्णिमा पर पूर्व सांसद चंदु लाल साहू ने क्षेत्र वासियों को दी बधाई…

परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद

पूर्व सांसद चन्दू लाल साहू ने माघ पूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर जिले के समस्त क्षेत्र वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि राजिम जो हैं प्रयाग राज्य है और हर वर्ष की भती प्रति वर्ष इस मांघ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हजारों श्रदालु राजिम कुंभ के इस कुंभ मेले में देश के कोने- कोने से हजरों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

बात करे महानदी नदी को पूरे छत्तीसगढ़ की जीवन दायनी नदी है और इसी तट पर बसी है राजिम नगरी।यह जो त्रिवेणी संगम है वह सोंढूर,पैरी व महानदी के त्रिवेणी संगम-तट पर बेस इस छत्तीसगढ़ की इस नगरी को श्रद्धालुओं,श्राद्ध, तर्पण,पूर्व स्न्नान,दान आदि धार्मिक कार्य के लिए उतना ही पवित्र मानते हैं जितना ही आयोध्या व बनारस को।मन्दिरो की माहनगरी राजिम की मान्यता है कि जगन्नाथ पुरी की यात्रा तब तक सम्पूर्ण नहीं होती जब तक यात्री राजिम की यात्रा नहीं कर लेता।

राजिम का मांग पूर्णिमा का मेला संपूर्ण भारत में प्रसिद्ध है छत्तीसगढ़ के लाखों श्रद्धालु इस मेले में जुटते हैं मांग पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक 15 दिनों का मेला लगता है इसे राजिम कुंभ मेला भी कहते हैं महानदी पैरी और सोनू नदी के तट पर लगने वाले इस मेले में मुख्य आकर्षण का केंद्र संगम पर स्थित कुलेस्वर महादेव मंदिर है। हालांकि अब इस मेले को राजीव मांग पुन्नी मेला कहा जाता है।

राजिम में महानदी और पैरी नामक नदियों का संगम है ।संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का संबंध राजिम की भक्तिन माता से है। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का संबंध राजिम के भक्तिन माता से संबंध है। कहते हैं छत्तीसगढ़ राज्य के राजिम क्षेत्र भक्तिन माता के त्याग की प्रथा प्रचलित है और पूरे साहू समाज के लोगों कि आस्था का प्रतीक हैं।

राजिम कुंभ में कुंभ की तरह ही एक दर्जन से ज्यादा अखाड़ा के अलावा साही जुलूस, संत साधओ का दरबार, झांकियां, नागा साधुओं और धर्मगुरुओं की उपस्थिति मेले के आयोजन को सार्थकता प्रदान करती है।
श्रद्धालुओं की अनगिनत आस्था संतों का आशीर्वाद और कलाकारों के समर्पण का ही परिणाम है । राजिम कुंभ जिसने देश में अपनी पहचान नए धार्मिक और संस्कृति संगम के तौर पर कायम कर ली है। इस मेले में छत्तीसगढ़ को देश भर में धर्म कला और संस्कृति की त्रिवेणी के रूप में याद कर दिया है और एक नई पहचान भी दी है। सच कहे तो अनादि काल से छत्तीसगढ़ियो के विश्वास और पवित्रता का दूसरा नाम राजिम कुंभ है।

इस पावन धरा पर पवन दीवान जैसे धार्मिक और आध्यात्मिक गुरु भी इस पावन धरा पर पैदा होकर राजिम की सोभा बड़ा दी हैं। कहा जाता हैं कि राजिम माता का यह जो जगह है वह तपो भूमि व कर्म भूमि भी हैं। भक्तिन माता का पूरा आस्था लोंगो को बांध के रखी है।

उन्होंने गहरी शोक भी जाहिर की मांग पूर्णिमा के इस अवसर पर शाही स्नान करने निकले भिलाई के पांच परिवारों की आकस्मिक दुर्घटना से मृत्यु हो जाने से गहरी शोक व्यक्त की है।

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