आध्यात्मिक जीवन की 25 वर्ष पूर्ण करने वाले ब्रम्हकुमार एवँ ब्रम्हकुमारी का सम्मान

छुरा …..नयापारा राजिम छत्तीगढ़ के कुंभ नगरी राजिम नयापारा नगर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की त्रिमूर्ति भवन सभागार में  आध्यात्मिक जीवन की 25 वर्ष पूर्ण करने वाले ब्रह्माकुमार व ब्रह्मकुमारी भाईयो एवं बहनों का सम्मान व आलौकिक तपस्वी जीवन के अनुभव कार्यक्रम आयोजित किया गया।
   सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी पुष्पा दीदी द्वारा आयोजित कार्यक्रम  में चंपारण उप  सेवाकेंद्र के करीब 21 समर्पित ब्रह्माकुमार व ब्रह्मकुमारी भाई बहनों का स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर  आशीर्वचनों के साथ सम्मान  किया गया । साथ ही बाबा भाई के दिव्य गीत व सु मधुर संगीत एवं बी के आरती बहन के स्वागत नृत्य ने समाबंधा।
 इस अवसर पर इंदौर से धार्मिक प्रभाग के जोनल कोर्डिनेटर ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने कहा कि युवा शक्ति विश्व परिवर्तन की आधार शीला है।जिस देश का युवा वर्ग सम्मार्ग पर चलता है उस देश का भविष्य अति उज्जवल होता है।युवाशक्ति बहती नदी के समान है,जिसे यदि बांध , बांधकर दिशा दे दी जाए तो वह असंभव को भी संभव करने की क्षमता रखती है।अपने आध्यात्मिक जीवन काल के 25 वर्ष निर्मल
 पवित्र सुकुमार जीवन व्यतीत कर क्षेत्र व सामाज को गौरवान्वित कर रहे , ये युवा भाई , बहने विश्व कल्याण की भावना अपने मन विचारो व दिलो में समाकर समर्पण भाव से परमात्म के यज्ञ की सेवा कर रहे है,जिसे देख ईश्वर भी खुश होता होगा।ऐसे महातपस्वी आत्माओं की झलक दुनिया भी देखना चाहती है।
  अपने आशीर्वचन में सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी ने कहा कि कुमार व कुमारियों का यह पवित्र जीवन बहुत ऊंचा है,जिन्होंने विकारों पर जी पाकर सारा जगत जीत लिया ।परमात्मा पिता का दिल जीत लिए।उन्होंने अपने तपस्वी जीवन के अनुभव को बताया कि इस मायावी दुनिया में कदम –   कदम पर परिस्थितियां है ,पर परिस्थितियों से डरना नहीं है आगे बढ़ना है।आगे प्रकाश व पीछे छाया है।
आप का जीवन इतना श्रेष्ठ हो कि अनेकों को प्रेरणा मिले।
 चंपारण सेवाकेंद्र की इंचार्ज ब्रह्माकुमारी सकुंतला बहन ने बताए की आज से करीब 25  – 30  वर्ष पूर्व चंपारण क्षेत्र में ईश्वरीय ज्ञान का बीज डला था।और अनेक भाई बहनों के अथक प्रयास से इस ज्ञान के बीज ने एक पाैधे का रूप लिया आज वह पाैधा वट वृक्ष बन चुका और उनका प्रत्यक्ष प्रमाण है,आज इतने कुमार कुमारिया समर्पित रूप से देश के विभिन्न स्थानों में सेवाएं दे रहे है। 
  इस अवसर पर सभी सम्मानित ब्रह्माकुमार देव प्रकाश, माखन, जितेंद्र ,भानु ,सतीश,तेजस्वी,सुधो,सत्तू लखन,देवदत्तं भाई एवं ब्रह्माकुमारी यशोदा बहन खुस्बू, प्राचि बहन ,हेमलता, अंकिता, आदि बहनों ने अपने तपस्वी जीवन के 25 वर्ष के अनुभव व्यक्त किए। तत पश्चात् सभी को ब्रह्मा भोजन कराया गया जिसमें संस्थान के सदस्य गन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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