संकुल केंद्र तेलीगुंडरा एवम गुजरा में हुआ ” नवा जतन ” उपचारात्मक शिक्षण पर आधारित कार्यशाला का आयोजन “— प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक शाला के शिक्षक हुए शामिल

पाटन। संकुल स्त्रोत केंद्र तेलीगुंडरा एवम गुजरा के अधीनस्थ शासकीय उच्च प्राथमिक शाला एवम शासकीय प्राथमिक शाला के शिक्षकों का ” नवा जतन ” उपचारात्मक शिक्षण प्रक्रिया पर आधारित कार्यशाला का आयोजन शासकीय उच्च प्राथमिक शाला अखरा में किया गया जिसमें संकुल स्त्रोत केंद्र तेलीगुंडरा एवम गुजरा के अधीनस्थ शासकीय प्राथमिक एवम उच्च प्राथमिक शाला के शिक्षकों ने अपनी सहभागिता देते हुए प्रशिक्षण प्राप्त किया । प्रशिक्षण का शुभारंभ मां शारदे के तैलचित्र में पूजा अर्चना एवम संकुल शैक्षिक समन्वयक ललित कुमार बिजौरा (परसदा ) द्वारा सरस्वती वंदना ” हे वीणा वादिनी माँ मेरे मन में रमा तेरा नाम ” के साथ हुआ । पश्चात संकुल शैक्षिक समन्वयक संकुल स्त्रोत केंद्र तेलीगुंडरा जैनेन्द्र कुमार गंजीर ने ” नवा जतन उपचारात्मक शिक्षण प्रक्रिया पर आधारित प्रशिक्षण के संदर्भ में उपस्थित शिक्षकों को जानकारी दिया , उन्होंने बताया कि कोरोना काल में बच्चों का जो लर्निंग लॉस हुआ है उसे पूरा करने के लिए बच्चों का उपचारात्मक शिक्षण आवश्यक है। पश्चात मास्टर ट्रेनर ललित कुमार बिजौरा ने सभी शिक्षकों से अपने परिचय के साथ साथ शैक्षिक उपलब्धि एवम अंतर्निहित प्रतिभा को साझा करने आमंत्रित किया । सभी शिक्षकों ने अपने शैक्षिक उपलब्धियों एवम प्रतिभा को एक दूसरे को साझा किया , तथा शिक्षकीय कार्यकाल के दौरान कक्षा के अंदर एवम बाहर किस प्रकार से चुनौती उनके सामने आयी और चुनौती को सफलता के रूप में कैसे तय किया ये सभी अनुभव बताए गए । बीआरपी खिलावन चोपड़िया द्वारा नवा जतन कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया गया । उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान बच्चों में जो लर्निंग लास हुआ है उन्हें दृष्टिगत रखते हुए बुनियादी भाषा साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN ) प्राप्त न सकने वाले बच्चों का चिन्हांकन , मूल्यांकन , निदानात्मक परीक्षण एवम उपचारात्मक शिक्षण आवश्यक है । । ललित कुमार बिजौरा ने बताया कि उपचारात्मक शिक्षण की प्रक्रिया सामान्य शिक्षण के दौरान ही अपनाना है । विद्यालय को एवम 100 प्रतिशत बच्चों को दक्ष करने के लिए ” नवा जतन के 6 सशक्त तरीकों के बारे में बताया गया जिसके अंतर्गत– बच्चों को खुद सीखने के लिए प्रेरित करें , बच्चों को स्वंय से अधिक सीखने के लिए चुनौती दें , पियर लर्निंग , ग्रुप लर्निंग , के लिए विषय मित्र , गली मित्र बनाना , छात्रों की जिज्ञासा का सम्मान करें , सीखने की प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी का उपयोग , सेल्फी विथ सक्सेस के बारे में बताया । उन्होंने प्रतिदिवस के गतिविधि को वीडियो , ऑडियो , फोटोग्राफ के माध्यम से साझा करने की बात कही ।बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही बुनियादी साक्षरता एवम संख्या ज्ञान आवश्यक है । उन्होंने बताया कि हमें बच्चों के नीड को समझना आवश्यक है और उसके अनुरूप गतिविधि संचालित किया जाना चाहिए । संज्ञानात्मक के अलावा सहसंज्ञानात्मक क्षेत्र में भी कार्य करने की आवश्यकता है । बच्चों के जीवन कौशल विकास हेतु कार्य करने शिक्षकों को प्रेरित किया गया । 100 दिन पठन एवम गणितीय कौशल विकास हेतु निर्धारित कार्यक्रम अनुरूप प्रति सप्ताह निर्धारित गतिविधियों को बच्चों के साथ करते हुए वीडियो , टीएलएम निर्माण कर सीखने सीखाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने प्रेरित किया गया ।मास्टर ट्रेनर खिलेंद्र साहू ने भी शिक्षकों को कक्षावार विषयवार निर्धारित दक्षता की सम्प्राप्ति हेतु नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से सीखाने पर जोर दिया । कार्यशाला में विशेष रूप से संकुल शैक्षिक समन्वयक (गुजरा) नवीन देशलहरे , बीआरपी घनश्याम साहू , बुधराम ठाकुर , दानेश्वर वर्मा , मन्नू लाल वर्मा , संजीव वर्मा , ममता साहू , चुनेश्वरी यादव , श्रीमती जंत्री वर्मा , चन्द्रकुमारी वर्मा , नीलिमा नेताम , श्वेता वर्मा , अशोक कुमार ओझा , अजय कुमार सेन , संतोष कुमार वर्मा , हेमन्त कुमार कुर्रे , योगेश्वर प्रसाद द्विवेदी , जालन्धर कोर्राम , विनोद कुमार पाटिल , देवाराम मेश्राम , ममता सोनी , योगेश कुमार , खिलेंद्र कुमार साहू , मनोज कुमार वर्मा , दरबार सिंह साहू उपस्थित रहे ।

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