परमेश्वर कुमार साहू@रायपुर। एक तरफ छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार किसानों के फसल का एक एक दाना उचित मूल्य पर खरीदने के लिए कई नियम बना रहे है और बड़ी बड़ी करते नहीं थक रहे है।लेकिन शासन प्रशासन की दावों का सच खोलता आरंग के एक गरीब और पीड़ित किसान,जिसका धान जिम्मेदारों की लापरवाही से नही बिक पाया।जिसकी वजह से किसान काफी चिंतित और तनावग्रस्त हो गया।जिसके चलते उनका स्वास्थ खराब हो गया और उसे आरंग के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
ये पूरा मामला रायपुर जिले के आरंग का है। जहां आरंग के लोधी पारा निवासी शिवकुमार लोधी उम्र 65 वर्ष ने आदिमजाति सहकारी समिति आरंग को धान बेचने पंजीयन के लिए सारे दस्तावेज जमा किए थे और उसे तीन जनवरी को धान बेचने के लिए समय भी दिया गया था।लेकिन जब किसान शिवकुमार लोधी धान खरीदी केंद्र पहुंचा तो पता चला कि उनका नाम कंप्यूटर में दर्ज ही नहीं है।सहकारी समिति आरंग के अधिकारी कर्मचारियों ने पंजीयन के लिए आवेदन तो जरूर लिया था।लेकिन लापरवाही इस कदर की इस किसान का नाम कंप्यूटर में प्रविष्ट ही नहीं किया गया था।जिसके चलते गरीब किसान सरकार की योजना से वंचित हो गए और इसी चिंता और तनाव से उसका स्वास्थ खराब हो गया।जिसे उनके परिजनों ने हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।जो तबीयत में सुधार आने के बाद उसे हॉस्पिटल से छुट्टी तो मिल गया है लेकिन अपना धान न बिकने से उक्त गरीब किसान अभी भी सदमे में है।पीड़ित किसान द्वारा आदिमजाति सहकारी समिति के जिम्मेदारो सहित आरंग तहसीलदार को भी गुहार लगाया।लेकिन किसी ने भी इस और ध्यान नहीं दिया।जिसके चलते गरीब किसान दर दर भटक रहे है और उसकी चिंता लगातार बढ़ रही है क्योंकि धान खरीदी अब दो चार दिन बस शेष है।वही न जाने कितने ऐसे किसान होंगे जो इस सिस्टम के सामने मजबूर होंगे जो अपनी व्यथा और पीड़ा दबाए चुपचाप होंगे।लेकिन किसी भी जिम्मेदारों को इन अन्नदाताओं की समस्याओ और पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है।
पीड़ित किसान शिवकुमार ने बताया कि हमारा संयुक्त आधिपत्य की कृषि भूमि पटवारी हल्का नंबर 54 आरंग में स्थित खसरा नंबर 754/5.870,2685/1/ख/3 रकबा क्रमश 0.2340,0.2020,0.0030 हेक्टेयर कुल खसरा नंबर 3 कुल रकबा 0.4390 राजस्व अभिलेख में दर्ज चला आ रहा है।जिसका राजीव गांधी किसान न्याय योजनान्तर्गत पंजीयन दिनाक 16721 को संपूर्ण दस्तावेज के साथ पंजीयन के लिए जमा किया था।जिसका रसीद भी मुझे दिया गया है।लेकिन हमारे संयुक्त खाते की भूमि का धान विक्रय पंजीयन में छोड़ दिया गया है।जिसके कारण मै अपने कृषि भूमि से उपार्जित फसल को विक्रय नही कर पा रहा हु।जिसके चलते मुझे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है।उन्होंने बताया कि कर्ज लेकर अभी अपनी बेटी की शादी किया हु और खेती के लिए खाद दवा भी उधार में लिया था। धान न बिकने से मै कर्ज तले बोझ दबता जा रहा हु।
वर्जन
आवेदन प्राप्त हुआ था।जिसे संबंधित उच्च विभाग को भेज दिए है।
गोविंद सिन्हा,तहसीलदार आरंग
