धान खरीदी केंद्रों में अव्यस्थाओ की खुली पोल ,झमाझम बारिश से फिर भीगा धान जिम्मेदारों की लापरवाही से शासन को उठाना पड़ रहा है भारी नुकसान

परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद

बीते रात को झमाझम बारिश से एक बार फिर खरीदी केंद्र मंडियों में रखें धान की बोरिया भीग गई है ।जो एक बार फिर फड़ प्रभारी एवं व्यवस्थापक के ऊपर व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपए खर्च होने दावों की पोल खुल गई है। बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब इस प्रकार की लापरवाही बरती जा गई है। मामला पांडुका आदिम जाति सहकारी समिति का है जिसमें 3 खरीदी केंद्र है पांडुका, पोंड और सांकरा है । हर साल इन खरीदी केंद्रों को रखरखाव व्यवस्था एव धान को बचाने के लिए शासन प्रशासन द्वारा लाखों रुपए दिया जाता है, पर जिम्मेदारो के लापरवाही की वजह से हर साल इस तरह धान सड़ जाता है वह खरीदी गई धान पूरी तरह बर्बाद हो जाता है।लेकिन इन सब चीजों से शायद जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ता । अचानक हुई बारिश से इन खरीदी केन्द्रो मे यही सब देखने को मिला ।जहां पर सैकड़ों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे ऐसे ही पड़ा था जो पानी से भीग गया और न ही ढकने का भी प्रयास नहीं किया गया। यहां व्यवस्थापक एवं फड़ प्रभारी दवारा हर साल ऐसा हि किया जाता है जो किसी से छुपा नही है ।सैकड़ो कुंटल भीगे धानों में अंकुरित होना निश्चित है ।जिसका नुकसान फिर शासन प्रशासन को ही उठाना पड़ेगा।

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