पाटन। विगत बीस साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे ग्रामीणों ने एक अलग रास्ता अपनाकर प्रशासन तक बात पहुचाने का प्रयास कर रहे ,सुबह से अपने गांव के तालाब में कड़ाके की ठंड में महिलाओं के साथ पुरुष भी गले तक पानी मे जाकर आंदोलन का रास्ता अपना रहे है।
पाटन विधानसभा के ग्राम पतोरा के आश्रित गांव देउरझाल जहाँ के लोग कई वर्षों से स्वतंत्र राजस्व गाँव बनने का सपना देख रहे है । लेकिन लगातार प्रशासन से मांग करने के बाद भी मांगो को गंभीरता से नही लेने पर गाँव के ग्रामीण अपने गांव के तालाब में हर सुबह तालाब में जाकर प्रदर्शन कर शासन प्रशासन को ध्यान आकृष्ट करने हेतु यह कदम उठा रहे है।
दो बार सड़क पर बैठ कर ,प्रदर्शन भी
दो बार पाटन से दुर्ग जाने के मुख्य मार्ग पर पूरे ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन भी किया गया लेकिन अधिकारियों द्वारा सिर्फ कोरे आश्वाशन मिला ।जिससे ग्रामीणों के मन मे लगातार द्वेष उपजा और आज इस तरह जल में प्रदर्शन को मजबूर 2018 में वर्तमान विधायक भूपेश बघेल ने भी किया था पहल – ग्रामीणों की मांग पर वर्तमान विधायक भूपेश बघेल ने पहल किया था बाकायदा घोषणा भी किया गया था लेकिन अब मुख्यमंत्री बनने के बाद भी प्रक्रिया में किसी प्रकार की गति नही होने से नाराज ग्रामीण इस तरह का प्रदर्शन कर रहे है।
ग्राम सभा से 2017 में प्रस्ताव भी पास,तकनीकी दुविधा भी नही – 2017 में तात्कालिक सरपंच तारिणी वर्मा के अध्यक्षता में ग्राम सभा का अनुमोदन भी किया गया उसके बाद किसी प्रकार की आपत्ति भी नही लगाई गई थी ,स्वतंत्र राजस्व गांव बनने जा रहे ग्रामीणों को फिर धोखा का सामना करना पड़ा।
जब तक ठोस कार्यवाही नही तब तक प्रदर्शन करने का निर्णय – ग्रामीणों ने बैठक कर निर्णय लिया कि हमे जब तक शासन द्वारा ठोस कार्यवाही नही करती तब तक लगातार हर दिन 3 घंटे तालाब में जलसमाधि की तरह प्रदर्शन किया जाएगा ।
इन्होंने लिया जलसमाधि में भाग
पुरेन्द्र जांगड़े,चेलाराम ,यशवंत कुर्रे ,भूपेंद्र मनहरे खूबचंद देशलहरा ,प्रेमिन बाई ,उत्तरा जांगड़े ,राजेश शांति साहू चंद्रा यादव, योगेस्वर जांगड़े ,किरण टंडन , सतन बाई ,आहेलिया बाई ,सजनी बाई , रमला सरोजनीबाई मोतिम हेमिन सहित ग्रामीण जन प्रदर्शन में शामिल थे।
