- जिम्मेदार संकुल समन्वयक ही तोड़ रहे नियमों तो बाकी का क्या?
परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। जिले के आदिवासी विकासखंड छुरा में शिक्षा की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर एक बड़ी लापरवाही देखने को मिला।शिक्षकों के स्कूलों से टाइम बे टाइम स्कूलों से नदरत हो जाने से पढ़ने वाले स्कूली बच्चों के शिक्षा व्यवस्था और भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा रहा है। बता दे की कोरोना महामारी के वजह से 16 माह स्कूल बंद रहा। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई बहुत प्रभावित हुई । अब जाकर जब स्कूल खुला तो शिक्षक अपने स्कूलों से गायब मिल रहे हैं । ऐसे में शिक्षा की व्यवस्था कितना सफल हो पाएगा,यह तो भगवान भरोसे ही है।
छुरा ब्लॉक के अंतिम छोर में घने वनों के बीच स्थित स्कूलों में शिक्षको में लापरवाही का आलम इस कदर है की स्कूल टाइम से लेकर स्कूल बंद होने तक कोई भी शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे। जन्हा बिना शिक्षक के बच्चे पूरा टाइम स्कूल में पढ़ते नजर।यह पूरा वाकया सोमवार जब हमारे संवाददाता पलेमा प्राथमिक शाला पहुंचे तब देखने मिला। जहां दोनों शिक्षक सुबह से लेकर शाम तक गायब रहे हैं। प्राथमिक शाला पलेमा ने तो शिक्षा व्यवस्था की सारी पोल खोल कर ही रख दिया। जहां सोमवार को संतराम कंवर और पुनीत राम दोनों शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे थे । फिर स्कूल के स्लीपर स्कूलों की साफ सफाई करने के बाद बच्चों को पढ़ाई करवा रहे थे । तथा कुछ बच्चे अपने आप से दूसरे को पढ़ा रहे थे। बच्चों ने बताया कि दोनों शिक्षक आज नहीं आया है तो हम लोग खुद से पढ़ा रहे है और पढ़ रहे है।
जबकि नियमानुसार शिक्षक पहले संस्था में आकर स्वयं की उपस्थिति देने एवं बच्चों के उपस्थिति लेने के उसके बाद वह कार्यालय में काम से बाहर जा सकता है। लेकिन पलेमा प्राथमिक शाला के दोनो शिक्षको की लापरवाही इस कदर है की इसकी करतूतों को सुनकर आप तो जरूर शर्मसार हो जाएंगे पर इन लापरवाह जिम्मेदारो को कोई फर्क नहीं पड़ता।मामले में गौर करने वाली बात ये भी है की पलेमा में पदस्थ शिक्षक संतराम कंवर खुद संकुल समन्वयक है।जो बैंक कार्य का बहाना बनाकर अपने साथी शिक्षक के साथ दिनभर स्कूल नहीं आए और न ही बच्चो का कोई हालचाल जाना।अब जब संकुल समन्वयक ही इस तरह से शिक्षको के विपरित कार्य करेंगे तो बाकी शिक्षको का क्या ये सबसे बड़ा सवाल है। सवाल ये भी है की आखिर इन लापरवाह शिक्षको सरकार इतनी भारी भरकम और वेतन सहित सारी सुविधाएं किस काम के लिए दे रही है।जबकि इन लापरवाहो को बच्चो के प्रति कोई सरोकार नहीं है।वही जब मौके से शिक्षक पुनीत राम को उनका पक्ष जानने जब फोन किया तो उन्होंने कहा कि संकुल समन्वयक मेरे साथ है हम बैंक आए है आपकी जो मर्जी में आए कर सकते हो।

बताना लाजमी है की यह क्षेत्र जंगलों से घिरा हुआ है और इन दिनों जंगली जानवरों का खासकर तेंदुए का आतंक होने की वजह से छोटे बच्चों की जान के ऊपर खतरा मंडराता रहता है ऐसे जिम्मेदार , शिक्षकों की जिम्मेदारी होती है कि बच्चों को 10:00 से 4:00 बजे तक कैसे संभालना है पर इन दिनों जिम्मेदार स्वय संकुल समन्वयक लोग अपनी जिम्मेदारियों पर खरा उतरता नही दिख रहा क्योकि इस दादारगाव संकुल का समन्वयक ही नियमों का पालन नही कर रहा तो साथी शिक्षक कहा से नियमो का पालन करेंगे । पूरे ब्लॉक में इन दिनों शिक्षक समय पर नहीं पहुंच रहे ना हि समय पर स्कूलो मे आ कर बच्चों को पढ़ा रहे है ।यही हाल दीवना स्कूलो का है ।यहां भी प्रधान पाठक रोज 12 बजे स्कूल पहुंच रहा है ।तो कुछ संकुल समन्वयक शिक्षकीय कार्य छोड़ अन्य कार्यो मे ध्यान दे रहे है ।ऐसे कार्यो की वजह से शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है ।
वर्जन
अनुपस्थित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उचित जांच व कार्रवाई की जाएगी
के.के. मतावले, बीईओ, छुरा
