- जिम्मेदार लापरवाह शिक्षक की मनमानी, निर्धारित समय से 2 घंटा लेट से रोज पहुंचते है स्कूल
परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। एक तरफ सरकार स्कूली बच्चो के शिक्षा को लेकर तरह तरह के जतन कर रहा है और शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने हर संभव प्रयास कर रहे है।जिसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षको को दी गई है।जिसके लिए सरकार इन शिक्षको को अच्छी वेतन के साथ साथ हर सुविधा प्रदान कर रहा है।लेकिन जिसके ऊपर इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है वहीं शिक्षक इस कदर लापरवाह हो गए है कि इन्हे बच्चो के भविष्य के प्रति तनिक भी परवाह नहीं है।जिसके चलते शासन के सारे प्रयासों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
आज एक ऐसे ही ठसनबाज शिक्षक बारे में बताने जा रहे है जो अपने आप को किसी कलेक्टर से कम नहीं समझता है।जिसे अपने ड्यूटी के फॉर्मेलिटी आलावा बच्चो की शिक्षा के प्रति कोई सरोकार नहीं है।हम बात कर रहे है आदिवासी बाहुल्य ब्लॉक छुरा के आखिरी छोर में बसे ग्राम दिवना के माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक पी.के. वर्मा की ।जो स्कूल खुलने के निर्धारित समय से रोज 2 घंटा लेट पहुंचते है। दिवना के इस प्रधान पाठक की ठसनबाजी देखिए रोज 2 घंटा लेट से 12 से 1 बजे स्कूल पहुंचता है और केवल रजिस्टर में उपस्थिति लगाकर स्कूल बंद होने से पहले फरार हो जाते है।जिसके हाथों में शासन ने देश के भावी पीढ़ी को शिक्षा देने बागडोर सौंपा है उनकी घोर लापरवाही और मनमानी देखकर तो ऐसा लगता है कि इसे संकुल समन्वयक से लेकर उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है क्योंकि लापरवाह शिक्षक पी.के.वर्मा कई वर्षों से इसी तरह रोज लेट से स्कूल पहुंच रहे है।लेकिन मानिटरिंग अधिकारियों के साथ मिलीभगत के चलते इनके ऊपर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुआ है।जिसके कारण इनके हौसले बुलंद है।ब्लाक भर के अधिकतर स्कूलों में यही हाल है ,ऐसा लगने लगा है कि नपदस्थ बीईओ का अपने कर्मचारियों पर लगाम नहीं है।अब सवाल ये है कि आखिर सरकार इन ठसनबाज शिक्षको को मनचाही वेतन और सारी सुविधाएं किस काम के लिए दे रही है?
गृह ग्राम में पदस्थ है संकुल समन्वयक, मनिटरिंग सही नहीं,शिक्षक पहुंच रहे लेटलतीफी
जिस उद्देश्य से शासन द्वारा संकुल समन्वयको की नियुक्ति की गई है,वह उद्देश्य पूरा होते नहीं दिख रहा है।क्योंकि अधिकतर संकुल समन्वयको ने अपनी नियुक्ति अपनी पहुंच के बल पर अपने गृह ग्राम में करवा रखा है।जिस कारण से अपने अधीनस्थ स्कूलों में न तो निरीक्षण कर रहा है और न ही किसी प्रकार के कार्यवाही में कोई रुचि।फलस्वरूप शिक्षक मनमर्जी समय पर स्कूल आ जा रहे है।जिसका खामियाजा छोटे छोटे बच्चो को भुगतना पड़ रहा है।
रोज स्कूल पहुँचने के सवाल पर ठसनबाज शिक्षक का बेतुका बयान
रोज निर्धारित समय से लेट पहुंचने और समय से पहले स्कूल से चले जाने संबंधी जब दीवना के माध्यमिक शाला के एचएम पी. के.वर्मा को 12 बजे अतरमरा से गुजरते वक्त रास्ते में रोककर सवाल किया गया तो उन्होंने शिक्षको के विपरित गैर जिम्मेदाराना जवाब दिया,एक नजर उनके जवाब पर…
मेरा तबीयत ठीक नहीं रहता है मुझे बीपी की समस्या है, बच्चे लोग बहुत बदमाश है वे ही समय पर स्कूल नहीं आते इसलिए मै भी लेट से आता हूं और रही बात नौकरी की तो ,वैसे भी मै 30 साल नौकरी कर चुका हूं,अगर कोई मुझ पर दबाव बनाएगा तो मै रिजाइन कर दूंगा।मुझे तो पेंसन मिलेगा ही। डीईओ और बीईओ क्या करेगा।वो लोग सब जानते है। मै तो शौंक से नौकरी करता हूं,मुझे किसी से डर नहीं है।मेरा तबीयत हमेशा ठीक नहीं रहता मै अपने हिसाब से स्कूल आता हू।
वर्जन
दीवना के एक ग्रामीण से मुझे भी पता चला कि माध्यमिक शाला के एचएम रोज लेट से स्कूल पहुंचते है फिर मैंने उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है।अधिकारियों ने जल्द ही छापा मारने की बात किया है।
विनोद सिन्हा ,संकुल समन्वयक, अतरमरा संकुल
