बालोद। ये कहानी है श्रीमती केशरी साहू की जिनकी मेहनत और कड़ी प्रयास ने एक बंजर भूमि को उपजाऊ जमीन बनने पे मजबूर कर दिया।
बालोद जिला के गुंडरदेही तहसील में आने वाले ग्राम परसदा में रहने वाली श्रीमति केशरी साहू अपने गांव में खेती तथा मजदूरी कर अपने परिवार का पालन भरण में सहयोग करती थी। उनके घर मे उनके पास 1 एकड़ जमीन है जिससे उनका परिवार जैसे तैसे अपना जीवन व्यापन करते थे लेकिन अपने बच्चों की शिक्षा की उमीद आगे बड़ नही पाती थी क्योकि घर मे 3 बच्चे, बूढ़े सास- ससुर, स्वम केशरी साहू और उनके पति यानीकि पुरे सात सदस्य थे इतने मे एक एकड़ भूमि मात्र जीवन जीने के लिये था सपने पुरे करने के लिए नही |
उनके पास गांव में घर से ही लगा हुआ उनके पास लगभग आधा एकड़ जमीन बंजर पड़ा हुआ था जिसे उनके परिवार वालो ने बंजर समझ कर वर्षो पूर्व छोड़ दिया गया था। वह इस बात को चितित् थी कि अगर कोई खेतीबाड़ी का रास्ता दिखाने वाले मिल जाते तो वह सब्जी की खेती करती क्योकि उसे सब्ज़ी बाढी का अनुभव नही था फिर उसे पता चला की कोई रिलायंस फाउंडेशन नाम की सस्था गांव मे विगत एक दो वर्ष कार्य कर रही है तब
केशरी साहू ने मल्टी लोकेशन ऑडियो कांफ्रेंस मे भाग लिया जो की कोरोना काल मे 15/04/2020 को संपादित किया गया था | जहा से उनकी जीवन का एक नया शुरुवात हुई उस ऑडियो कांफ्रेंस मे केशरी साहू जी ने सब्जी बाजी लगाने के लिए अपने सवाल किये तथा वह अपने घर में पड़े बंजर जमीन की संबंधित चर्चा कृषि विशेषज्ञ श्री उगेंद्र पांडे जी से की एवं एक नई पद्धति से उसमे सब्जी उत्पादन करने की सोची, उसके बाद केशरी साहू जी रिलायंस फाउंडेशन के इस प्रकार के कार्यक्रम से भाग लेने लगी |
सब्जी लगाने के पूर्व रिलायंस फाउंडेशन के कृषि सलाहकार द्वारा उनको मृदा परीक्षण करवाने संबंधित जानकारी दिया एवं यहां से उनके खुशहाल जीवन का एक नया पन्ना शुरू हुआ।
केशरी साहू ने सर्वप्रथम अपने बड़ी का मृदा परीक्षण करवाया एवं सीजन के अनुसार अपने खेत में भिंडी की फसल लगाई लगातार अपने फसल में होने वाले बदलाव के साथ रिलायंस फाउंडेशन के विविध कार्यक्रम के माध्यम से सलाह लेकर अपने फसल का देखभाल करती रही उसने जुलाई 2020 से मार्च 2021 तक भिंडी की 2 बार फसल पुरे 50 डिसमिल् जमीन पे किया जिससे उसने एक फसल से 15 क्विंटल उत्पादन किया अब दोनों बार का फसल से उसे 30 क्विंटल उत्पादन किया जिसे उसने 18 रुपया प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेच कर करीब 54,000 रुपया की आमदनी प्राप्त किया जिससे उनका परिवार का जीवन स्तर में सुधार हुआ और उसमे से कुछ पैसे से अपने बेटी को बीएड में दाखिला करवाया शेष पैसे को बेटी की द्वितीय वर्ष की पढ़ाई एवं पढ़ाई में होने वाले खर्च के लिए बेटी के नाम से बेटी के खाते में जमा कर दिया और नए फसल की तैयारी करने लग गई। केशरी साहू ने अपने जीवन शैली में एक नया बदलाओ आने के लिए विशेष रूप से रिलायंस फाउंडेशन के प्रति आश्रित है एवं रिलायंस फाउंडेशन एवं उनके कृषि विशेषज्ञ का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया एवं अपने जैसे निम्न वर्गीय किसान की जीवन शैली में बदलाव हेतु रिलायंस फाउंडेशन से जुड़ने का आव्हान किया।
लाभ लेने की जिद और खेतीबाड़ी का रास्ता ने बनाया गांव का नंबर वन किसान
