देवउठनी एकादशी का पर्व 15 नवंबर से प्रारम्भ होंगे सभी मांगलिक कार्य–पंडित रामानुज युवराज पांडेय

✍️ रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

गरियाबंद— मैनपुर अमलीपदर कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाया जाने वाला पर्व देवउठनी जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है पर्व इस वर्ष 15 नवंबर दिन सोमवार को मनाया जाएगा इस पर्व के संबंध में दुर्गा मंदिर व जगन्नाथ मंदिर के पुजारी कथावाचक आचार्य रामानुज युवराज पांडे ने news 24 कैरेट संवाददाता से प्रेस वार्तालाप पर बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु विश्राम करते हैं जो कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं इस दिन भगवान सालिकराम का माता तुलसी के साथ पूरे विधि विधान से विवाह संपन्न कराया जाता है घर के आंगन में गन्ने का मंडप बनाया जाता है एवं मांगलिक गीत भजन गाकर उत्सव मनाया जाता है
आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तक विवाह आदि मांगलिक कार्यक्रम बंद रहते हैं तुलसी विवाह के साथ ही सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से दी देखा जाए तो तुलसी में अनेक औषधि गुण होते हैं इस दिन तुलसी विवाह के साथ तुलसी के सम्मान के साथ ही उसके संरक्षण समर्थन की प्रेरणा का प्रसार भी इस व्रत के माध्यम से मिलता है इस दिन व्रत रखकर पूजन करने का विशेष महत्व है भगवान शालिग्राम वके सांग माता तुलसी के विधि विधान से विवाह के साथ ही यह कामना की जाती है कि हमारे सभी मांगलिक कार्य भी निर्विघ्नं ता पूर्वक संपन्न हो

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