- लकड़ी तस्कर और विभाग की मिलीभगत से जंगलों का हो रहा है उजाड़
परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। एक तरफ शासन वनों की सुरक्षा के लिए तरह तरह के जतन कर रहे है और उसके लिए लाखो करोड़ो रुपए पानी की तरह बहा रहा है ताकि जंगल सुरक्षित रहे और पर्यावरण का संतुलन बना रहे।लेकिन यहां उल्टी गंगा बहते नजर आ रहा है।विभाग के जिम्मेदारों कि मिलीभगत से जंगलों का लगातार उजाड़ हो रहा है और सैकड़ों की तादाद में इमारती लकड़ियों की बेदम कटाई हो रही है।वनों के रक्षक लकड़ी तस्करों के साथ मिलीभगत कर वन के भक्षक बन गए है।जिसके चलते बहुमूल्य प्रजाति के इमारती लकड़ी बीजा की अवैध कटाई बदस्तूर जारी है और विभाग के आला अधिकारी मूकदर्शक बन बैठे हुए है।
गरियाबंद जिले के वन परिक्षेत्र पांडुका लकड़ी तस्करों के लिए पनाहगार बन गया है। जहा लगातार इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई से जंगलों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो रहा है। पांडुका वन परिक्षेत्र के पिपरछेड़ी बीट में बेशकीमती प्रजाति के इमारती लकड़ी बीजा से भरा पड़ा था जो लगातार कटाई से वीरान होता जा रहा है।जब हमारे संवाददाता ने इस बिट के जंगल का पड़ताल किया तो 3 दर्जन से अधिक इमारती लकड़ी बीजा का, ताजा ठूंठ ही ठूंठ दिखाई दिया और उनके बड़े बड़े लठ्ठे इधर उधर बिखरे पड़े थे।इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की इतने बड़े जंगल में न जाने कितने पेड़ काटेंगे होंगे,जबकि हमारी छोटी सी पड़ताल में हमने 3 दर्जन से अधिक इमारती लकड़ियों के ताजा ठूंठो को हमने कैमरे में कैद किया।तस्करों द्वारा बड़े बड़े बीजा के पेड़ों को काटकर जंगल को तहस नहस करने में लगे है।लकड़ी तस्करों द्वारा बहुमूल्य लकड़ी बीजा को दिन दहाड़े काटकर जंगल से पार किया जा रहा हो और विभाग को कानो कान खबर न हो बिना विभागीय सांठगांठ के संभव नहीं है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से इमारती लकड़ियों की कटाई और तस्करी से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इतनी मात्रा में इमारती लकड़ियों की कटाई के बावजूद भी तस्करों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

बीच जंगल में आरा मशीन से देव वृक्ष पीपल को कर दिया है धराशाई,विभाग की कार्यशैली पर उठने लगा है सवाल
पर्यावरण को संतुलित कर जीव मात्र को जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले देववृक्ष पीपल पर वन माफियाओं की कुदृष्टि पड़ गई है। जिसकी वजह से उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से पीपल के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई लगातार जारी है। जबकि इस वृक्ष से आक्सीजन प्रचुर मात्रा में प्राप्त होता है और पेड़ों की बात करे तो वह रात में आक्सीजन लेते है और कार्बन डाई आक्साइड छोड़ते है और दिन में कार्बन डाई आक्साइड लेते है, आक्सीजन छोड़ते है किन्तु पीपल ऐसा पेड़ है जो दिन रात आक्सीजन ही छोड़ता है। शायद इसी वजह से हिन्दू धर्मशास्त्र व परंपराओं में पीपल की पूजा करने की परम्परा रही है। चाहे पितृपक्ष हो या श्राद्ध संस्कार या शनिदेव से बचने की बात, इन सब में पीपल की ही पूजा होती है। वहीं इनका फल और फूल वन्य पशु पक्षियों को भोजन प्रदान करता है।जिसे आज जीवनोपयोगी इस पेड़ के अस्तित्व को अपने फायदे के लिए नष्ट करने पर आमादा हो गये हैं वन माफिया, जो मानव जीवन के अस्तित्व पर ही कुठाराघात है। उल्लेखनीय है कि पांडुका रेज का कोई ऐसा गांव नहीं था, जहां एक दशक पहले पीपल के दर्जनों पेड़ नहीं थे किन्तु अब उनकी संख्या निरन्तर घटने लगी है।वन परिक्षेत्र पांडुका अन्तर्गत पीपरछेड़ी बीट के बीच जंगल में एक विशालकाय देव वृक्ष पीपल के पेड़ को आरा मशीन से काटकर धराशाई कर दिया गया और विभाग तमाशा देखते बैठा है ,इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है को वन विभाग में अधिकारी कर्मचारी लापरवाही की सारी हदें पार कर चुका है। लोगों की मानें तो इस लकड़ी से अच्छे किस्म की प्लाई वुड बनाई जाती है। अन्य लकड़ियों से सस्ता मिलने वाला पीपल इन वन माफियाओं के लिए अधिक फायदे का सौदा साबित हो रहा है। फलस्वरूप पीपल के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है।
नौसिखिया रेंजर का अपने कर्मचारियों पर लगाम नहीं ,इनके आते ही शुरू हो गया पेड़ों की अवैध कटाई
बीते कुछ माह पहले तरुण तिवारी नामक नौसिखिया रेंजर का पांडुका वन परिक्षेत्र में आगमन हुआ।जिसका अपने कर्मचारियों पर थोड़ा भी लगाम नहीं है।जिसके आते ही जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई में जोरो से वृद्धि हो गया।जो विभाग के लिए सिरदर्द तो बनेगा ही साथ ही साथ जंगल और जंगली जीव जंतुओं के सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही साबित नहीं हो पाएगा।क्योंकि इनके आते ही प्रचुर मात्रा में जंगलों का उजाड़ शुरू हो गया है।हाल ही में त्यौहार सीजन में परिक्षेत्र के अनेकों बीटो में प्रचुर मात्रा में बेकिमशती बीजा प्रजाति के पेड़ों की दर्जनों की मात्रा में अवैध कटाई हुआ है और रेंजर साहब केवल शासन का डीजल पेट्रोल बर्बाद कर रास्ता नापने में लगे है।इन्हे जंगलों और जीव जंतुओं की सुरक्षा के प्रति कोई सरोकार नहीं है।बड़ी बड़ी डींगे मारने वाले नौसिखिए रेंजर अपने कारनामों को छुपाने अवैध कटाई का खबर छापने वाले पत्रकारों को वॉटशोप में अपमानजनक शब्द लिखने से भी गुरेज नहीं करते।हाल ही में परिक्षेत्र के अंदर अवैध कटाई का खबर लिखने वाले स्थानीय पत्रकार को व्हाट्सअप में अपमान जनक शब्द लिखकर खरी खोटी सुना डाले।जिससे विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।वहीं वन विभाग में कई ऐसे मामले है जिसको लगातार उजागर किया जाएगा।
इस मामले पर पक्ष जानने पिपरछेड़ी बीट गार्ड चेलक को फोन किया गया लेकिन उनकर नम्बर बंद आया।
आपकी द्वारा दिए गए जानकारी पर कार्यवाही किया जाएगा।मै अभी छुट्टी पर हूं । बीट गार्ड से बात करता हूं।
सखा राम नवरंगे ,डिप्टी रेंजर
