रिपोर्टर-परमेश्वर कुमार साहू
गरियाबंद। अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर मरीजों का इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों पर शासन और उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी स्वास्थ विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया जा रहा है।जिसके चलते इनके हौसले बुलंद है।हर मर्ज का इलाज करने वाले बीएमएस डाक्टर प्राथमिक उपचार से हटकर इलाज कर रहे है और मरीजों से मनमानी फिस के लालच में स्वयं शिशु रोग,स्त्री रोग सहित सभी रोगों के विशेषज्ञ बन बैठे है।ये डाक्टर एमबीबीएस की तर्ज पर हर बीमारियों का इलाज कर रहे है।लेकिन मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले इन झोलाछाप डाक्टरों पर विभाग द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं किया गया।विभाग के आला अधिकारियों के सरंक्षण में झोलाछाप डॉक्टर बेधड़क क्लीनिक संचालित कर अपना गोरखधंधा खूब चला रहे है।
जिले के छुरा ब्लॉक के आखिरी छोर में स्थित ग्राम कुटेना में रिखी राम साहू द्वारा बिना विभाग के परमिशन खुलेआम अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर महिला,बुजुर्ग सहित बच्चो का इलाज कर रहे है।इनके पास इलाज करने संबंधी न कोई डिग्री है और न ही विभाग से कोई परमिशन उसके बावजूद भी बेधड़क हर प्रकार के बीमार से ग्रसित मरीजों का इलाज कर रहे है। यंहा तक की कमरे के भीतर संचालित क्लीनिक में महिलाओ को इंजेक्शन के साथ साथ बाटल भी चढ़ा रहे है और प्रतिबंधित दवाई भी मरीजों को देकर फीस के नाम पर मनमानी राशि वसूल रहे है।जब मामले का पड़ताल किया गया तो वन्हा दो दर्जन से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंचे थे जिसमे अधिकतर महिला और छोटे छोटे बच्चे थे।कमरे के अंदर महिला मरीज को झोलाछाप डॉक्टर रिखी राम साहू इंजेक्शन लगाते मिले।वहीं 2-3 साल के बच्चो को भी इंजेक्शन लगाते हुए देखा गया।जानकारी के मुताबिक झोलाछाप डाक्टर रोज सैकड़ों मरीजों का इलाज करते है।जिसमे हर प्रकार के मरीज शामिल है।वहीं जब क्लीनिक संचालन और मरीजों को इलाज संबंध मे रिखी राम साहू को उनका पक्ष जानने पूछा गया तो उन्होंने धौंस देते हुए बताया कि मै सिंगपुर से प्रशिक्षण लिया हूं 20 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूं। मैंने क्लीनिक संचालित करने संबंधी कोई बोर्ड न गाड़ी में लागया है और न ही घर पर।मेरा विभाग में मरीजों का इलाज करने और क्लीनिक चलाने को पंजीयन नहीं हुआ है।
विभाग की खुली पोल ,सरकार की योजना हो रहा फेल
गौरतलब है शासन द्वारा लोगो को बेहतर स्वास्थ व निशुल्क चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने विभिन्न प्रकार के योजना चला रहे है।जिसके लिए हर 3-4 किलोमीटर की दूरी पर वेलनेस सेंटर सहित उपस्वास्थ्य केंद्र खोले है। जहा निशुल्क इलाज के साथ सही दवाई भी मुफ्त मिलता है।लेकिन विभाग की उदासीनता के चलते ये योजना गरियाबंद जिले में पूरी तरह से दम तोड़ता नजर आ रहा है।प्रचार प्रसार के अभाव और झोलाछाप डॉक्टरों के मकड़ी जाल के वजह से सरकार की निशुल्क इलाज की योजना पूरी तरह से फ्लाफ हो गया है।जिसका फायदा झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे है और मनमानी राशि इलाज के नाम पर वसूली कर मरीजों का जेब ढ़ीली कर रहे है।तो वहीं क्षेत्र के उपस्वास्थ्य केन्द्र और वेलनेस सेंटर खाली खाली नजर आ रहा है।शासन द्वारा करोड़ों रुपए स्वास्थ विभाग में खर्च करने के बाद योजनाओं का सही तरह से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।इसका मुख्य कारण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता है।जो सरकार से तनख्वाह और सारी सुविधा मिलने के बावजूद भी अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं है। जिम्मेदार पद बैठे स्वास्थ विभाग के गैर जिम्मेदार अधिकारियों को आम जनता के प्रति कोई सरोकार नहीं है।जिसके चलते झोलाछाप डॉक्टर मरीजों के जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है।जो विभाग के कार्यों की पोल खोल रहा है।
