पाटन। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं कृषि उपज मंडी दुर्ग के अध्यक्ष अश्वनी साहू ने दुर्ग सांसद के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विजय बघेल दुर्ग सांसद का बयान थूक में पॉलिश लगाने जैसा है।
विजय बघेल एक तरफ डी पुरंदेश्वरी के बयान का बचाव कर रहे हैं और स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि दक्षिण भारतीय होने के कारण थूक में बह जाएंगे वाला बयान दे डाला । भाजपा प्रभारी डी पुरंदेश्वरी का बयान छत्तीसगढ़ के लोगों के भावनाओं का अपमान है, छत्तीसगढ़ राज्य की संस्कृति का अपमान है, और इस बयान के लिए भारतीय जनता पार्टी भाजपा प्रभारी को माफी मांगनी चाहिए ।
यदि भाजपा प्रभारी को छत्तीसगढ़ की संस्कृति का ज्ञान नहीं है तो उसे तत्काल प्रभारी पद से हटाना चाहिए l अगर यह बयान सही नहीं है तो क्या भाजपा यह बताएंगे कि पाटन की सभा में पूर्व मंत्री रामविचार नेताम ने भूपेश बघेल के जिंदाबाद नारा लगाया था वह भी अपनी ही सभा में , क्या यह सही है? यदि ऐसा है तो रामविचार नेताम का बयान विचारने योग्य है। इस पर विजय बघेल क्या कहेंगे ? दरअसल डी पुरंदेश्वरी को छत्तीसगढ़ भाजपा की जमीनी हकीकत पता चल गया है और वह कांग्रेस की सरकार को नहीं बल्कि अपने ही कार्यकर्ता को बोल रही थी की दो हजार अट्ठारह के चुनाव में जनता ने फूंक मार दिया है और 2023 के चुनाव में भी यही होने वाला है क्योंकि भाजपा के पास कोई मुद्दा ही नहीं रह गया है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल की छत्तीसगढ़िया सरकार ने सभी वर्गों के लिए कार्य कर जनता का विश्वास जीत लिया है ।
अश्वनी साहू ने विजय बघेल के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है,कि राम सबके आराध्य है प्रत्येक जीव में राम का वास है।( सिया राम मैं सब जग जानी) भाजपा के लोग राम नाम का सहारा लेकर हमेशा सद्भावना को बिगाड़ने का काम किया है और आज छत्तीसगढ़ की सरकार राम वन गमन पथ के लिए काम कर रही है तो भाजपा को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है इसलिए अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं ।
खाद के मामले में विजय बघेल अपनी सरकार को पूछने के बजाय राज्य की सरकार से सवाल कर रहे हैं देश का किसान 9 महीने से लगातार आंदोलन कर रहे हैं कभी इस पर विजय बघेल बयान देंगे? अगर वाकई में आप किसानों का हित चाहते हैं तो छत्तीसगढ़ के धान और चावल को सेंट्रल पूल में उठाव के लिए मोदी सरकार को बाध्य करें या फिर किसानों से माफी मांगे।
विजय बघेल मुख्यमंत्री जी के खिलाफ अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं तो उस समय उनकी नैतिकता कहाँ गई थी जब मंच साझा कर गले लग कर फोटो खिंचवाते रहे तो कभी विद्याचरण शुक्ला के घड़ी छाप तो कभी अजीत जोगी के साथ निष्ठा दिखाने की कोशिश हो रही थी। जब जोगी के सरकार में भूपेश बघेल मंत्री थे उस समय भी दुर्ग सांसद विजय बघेल ने आरोप लगाया था, तो विजय बघेल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ था और अंत में न्यायालय से एवम व्यक्तिगत रूप से भूपेश बघेल से माफी माँगना पड़ा था। बार-बार पार्टी बदलने के लिए माहिर किस मुंह से बात करते हैं ।
मुख्यमंत्री जी ने साफ तौर पर कहा है कि पुलिस और कानून से ऊपर कोई नहीं है चाहे मेरे पिता हो या अन्य कोई। राज्य की पुलिस अपना काम करेगी छत्तीसगढ़ में किसी को इजाजत नहीं कि कोई वर्ग विशेष के संबंध में अनर्गल टिप्पणी करें यह बर्दाश्त नहीं ।
