समाज का युवा एक स्वस्थ और विकसित समाज का का दर्पण होता है, युवा कौशल दिवस पर रिलायंस फाउंडेशन ने अपने विगत 8 वर्षों में राजनांदगांव में कार्यरत कौशल विकास पर किये गए अनुभव को साँझा किया.
रिलायंस फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक जागरूकता, भोजन सुरक्षा, जल सुरक्षा, पोषण सुरक्षा के साथ कौशल विकास भी रहा है.
रिलायंस फाउंडेशन का प्रयास हमेशा रहा है कि कौशल विकास को ग्रामीण विकास का आधार बनाया जाए. विगत कुछ वर्षों में रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा कौशल विकास हेतु कई कार्य किए गए हैं, जिनमें ग्रामीण स्तर में आवश्यकता के अनुसार महिलाओं को दिया गया सिलाई प्रशिक्षण, हैंडलूम प्रशिक्षण हो या फिर मशरुम उत्पादन की ट्रेनिंग हो इन सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम ने युवाओं को प्रोत्साहित किया है कि वह एक नए कौशल कोशिश करके अपने आजीविका में एक नया आयाम जोड़ें.
मशरूम को आजीविका का नाया जरिया बनाने वाले युवा ग्राम डोम्हाटोला के दीपक वर्मा ने कहा “रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से अपने गांव में मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग मिलने के बाद कोरोना काल में अब तक 210 किलो मशरूम का उत्पादन कर के लगभग ₹42000 की अतिरिक्त आमदनी कर चुका हूं”
रिलायंस फाउंडेशन ने आईसीआईसीआई फाउंडेशन के साथ में मिलकर के राजनांदगांव के 8 गांव में 206 व्यक्तियों मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दी थी जिन्होंने मशरूम उत्पादन को आजीविका नए स्रोत के रूप में शुरुआत की और आज मशरूम उत्पादन कर अपने परिवार के जीवन यापन में सहयोग कर रहे हैं.
कुछ ऐसा ही कहना है ग्राम पेटेश्री से अनीता साहू और ग्राम डोम्हाटोला से प्रियंका वर्मा का उन्होंने कहा कि “रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा पिछले वर्ष अपने-अपने गांव में सिलाई प्रशिक्षण दिया गया. 1 माह तक चले इस प्रशिक्षण में हमने कपड़े बेहतर तरीके से सिलने का अनुभव प्राप्त किया उसके बाद अपने गांव में ही रह कर अपने घर से महिलाओं के सलवार सूट साड़ी ब्लाउज पीको फॉल इत्यादि का काम करने लगे जिससे जिससे प्रतिमाह लगभग 3000 से ₹4000 की अतिरिक्त आमदनी हम कर के अपने परिवार को इसको ना काल के समय भी सहयोग कर रहे हैं”
अनीता व प्रियंका रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा सिलाई हेतु दिए गए ट्रेनिंग के 250 प्रशिक्षुओं में से है जिन्हें राजनांदगांव जिले के 12 गांव से समय-समय पर सिलाई प्रशिक्षण दिया गया.
कुछ ऐसा ही अनुभव ग्राम पेंड्री से उषाबाई साहू ने साझा किया
जिन्हें रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से ग्राम पेंड्री में ही बुनकर सहकारी समिति के द्वारा हथकरघा का प्रशिक्षण दिया गया था, आज वह उन 35 महिलाओं में से हैं जो अपना आजीविका घर में 2- 3 घंटे हथकरघा चला कर के प्रति माह 2000 से लेकर के ₹3000 तक की अतिरिक्त आमदनी कर अपने परिवार को सहयोग कर रही हैं.
रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा किसानों को सब्जी उत्पादन हेतु प्रशिक्षण प्रशिक्षण भी
मुहैया कराया गया है सब्जी उत्पादन की ट्रेनिंग मुख्यतह कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र राजनांदगांव के वैज्ञानिकों के सहयोग से मिला, विगत वर्षों में लगभग 200 से ज्यादा किसानों ने सब्जी उत्पादन की प्रशिक्षण प्राप्त करके खेती से धान के अतिरिक्त सब्जियों का उत्पादन कर एक बेहतर आय प्राप्त कर सम्मान पूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं. ग्राम विष्णुपुर के चमन वर्मा ने कहा कि “हम घर में सब्जियां पहले भी उग आते थे, लेकिन रिलायंस फाउंडेशन के द्वारा सब्जियों के उत्पादन के लिए जो प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया उसमें हमें नई तकनीक और नए फसलों की वैज्ञानिक विधि से खेती करने का प्रशिक्षण मिला जिससे हमारा सब्जी का उत्पादन और सब्जी का क्षेत्रफल दोनों बढ़ा, आज मैं अपने 4 एकड़ के खेत से प्रतिवर्ष लगभग ₹5-6 लाख की सब्जियां उत्पादन कर रहा हूं “
आज के तारीख में आजीविका के लिए किसानों व युवाओं के लिए नया कौशल सीखना बेहद आवश्यक है जिससे आने वाली पीढ़ी बदलते समय के मांग अनुसार ढल कर एक स्वर्णिम भविष्य बना सके.
