✍? रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
गरियाबंद
देवभोग ब्लाक अंतर्गत ग्राम सुपेबेड़ा प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत घर-घर शौचालय बनाकर खुले में शौच नहीं करने की मंशा को सूपेबेडा के सरपंच सचिव ने पानी फेर दिया है। बेसहारा विधवाओं की शौचालय तोड़कर उक्त स्थल पर आंगनबाड़ी भवन निर्माण करा दिया है। जिसकी शिकायत कर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से लेकर प्रधानमंत्री तक कार्यवाही के लिए मांग रखा है। यहां बताना लाजमी होगा कि भूमि है बुजुर्ग विधवा महिला 48 वर्षीय उषा पति स्वर्ग श्री सार्थक जेमो बाई साधनी, सुरेखा, आंवला बाई, उषा डमरू धर, कौशल्य सहित अन्य हितग्राहियों के भूमिहीन होने के कारण तत्कालीन सीईओ ने सड़क किनारे शासकीय भूमि पर 12 हितग्राहियों के लिए 1 लाख 44 हजार खर्च कर शौचालय बनाया रहा ।लेकिन इस शौचालय का इस्तेमाल करने का मौका तक हितग्राहियों को नहीं मिल पाया। और सरपंच सचिव ने शौचालय को तोड़कर स्थल पर आंगनबाड़ी भवन निर्माण लगभग पूरा कर दिया है। जिसके चलते अब वह बुजुर्ग विधवा महिलाएं खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने जिला सीईओ से लेकर पीएम कार्यालय तक भेजा है। शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने सरपंच पति द्वारा चयनित स्थल पर पुलिया ना बनाकर अपने खेत के मार्ग पर बनाया है। ताकि खेत आवागमन में सहूलियत हो। इसके साथ कोविड सेंटर में लगाए पंखा इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को भी गायब करने का आरोप लगाया है। साथ ही 14वें वित्त मद की राशि निकालकर जमीनी स्तर पर कार्य नहीं करने सहित 13 बिंदुओं में लिखित शिकायत पर जांच एवं कार्यवाही की मांग किया है ।क्योंकि पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा ग्रामीणों को लंबे समय से मूलभूत सुविधा के लिए उपेक्षित रखा है। लगातार नियमों अनुसार 14वें वित्त की राशि व्यय करने की मांग को अनसुना कर अपने मनमर्जी अनुसार लाखों रुपए का व्यारा नियरा कर दिया है। जिसकी जांच जल्द से जल्द नहीं करने की स्थिति में जिला मुख्यालय पहुंचकर कार्यालय घेरने की स्थिति से जिम्मेदारों को भी अवगत कराया है

देवभोग सीईओ एमएल मंडावी :
उच्च अधिकारियों से अभी जांच के आदेश नहीं मिला है फिर भी अगर इस तरह की शिकायत है तो जल्द से जल्द जांच कर कार्यवाही किया जाएगा ।
