जिनके भरोसे है छग राज्य लघु वनोपज संघ : उन्हीं के साथ खिलवाड़ पंद्रह सालों के भाजपा शासन में चार आदिवासी, वनमंत्री रहे, फिर भी अपने ही समुदाय के साथ किया छल

रिपोर्टर: प्रांजल झा….

कांकेर। 2018 के विधानसभा चुनाव, सफलतापूर्वक संपन्न होने के पश्चात, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के जमीनी ताकत कहे जाने वाले तेंदूपत्ता संग्रहण में और अन्य वनोपज के, ग्रामीण स्तर पर कार्य करने वाले फड़मुंशी अब गंभीर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।

उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के प्रबंध संचालक सहित, छत्तीसगढ़ शासन को चेतावनी दी है कि हमारा शोषण और दोहन ज्यादा ना किया जावे। हमारा उपयोग किया गया और निरंतर जारी है। कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने के बाद भी, हमें तृतीय वर्ग कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है, हमें प्रतिवर्ष ₹12000 मानदेय देने की बात कही गई थी, वह भी नहीं दी जा रही है।

मरवाही विधानसभा के उपचुनाव में भी हमारा उपयोग किया गया, लेकिन हमारी मांगे पूरी नहीं की जा रही है, छत्तीसगढ़ में करीब 10,000 फड़ मुंशी है, वर्तमान में इन्हें प्रतिमाह ₹600 के हिसाब से प्रति वर्ष 72 सौ रुपए दिए जा रहा है और हमें बताया गया कि छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के संचालक मंडल की बैठक में ₹12000 प्रतिवर्ष देने का निर्णय लिया गया है, छत्तीसगढ़ शासन की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली जन घोषणा क्रियान्वयन मंत्री परिषद की समिति में भी यह निर्णय लिया जा चुका है कि प्रतिमाह ₹1000 के हिसाब से वर्ष का ₹12000 मानदेय दिया जाएगा। शासन को प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा, लेकिन ढाई वर्ष हो चुके हैं, हमारी मांगे पूरी नहीं की जा रही है हमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से भी भेंट करने नहीं दिया जा रहा है। शायद उन्हें भी गुमराह किया जा रहा है, हम उन्हें वास्तविकता बताना चाहते हैं कि किस तरीके से छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के प्रबंध संचालक सहित अन्य अधिकारी, वन मंत्री और मुख्यमंत्री को और छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग को गुमराह किया जा रहा है।

अलग-अलग प्रस्ताव वित्त विभाग को प्रेषित करने के कारण भी वित्त विभाग उस पर निर्णय नहीं ले पा रहा है, यह सब षड्यंत्र छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के प्रबंध संचालक और उनके अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा, सरकार की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है‌। फड़ मुंशीयों ने शासन को चेतावनी दी है और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अधिकारियों को भी चेतावनी दी है कि अगर हमारी मांग 1 सप्ताह के अंदर पूरी नहीं की जाएगी, तो हम लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे‌।

अब निर्णय मुख्यमंत्री, वन मंत्री और जन घोषणा पत्र क्रियान्वयन समिति मंत्री परिषद को, इसे संज्ञान में लेना चाहिए‌। नहीं तो एक आंदोलन सरकार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ के 28 जिलों में प्रारंभ होने जा रहा है।

हालांकि यह सब विषय विपक्ष भाजपा को उठाना चाहिए, लेकिन शायद वह घोर निंद्रा में है सोई हुई है, उसके कोई नेता इस मामले को संज्ञान में नहीं ले रहे हैं जबकि भाजपा शासनकाल में 15 वर्ष में 4 आदिवासी समाज से वन मंत्री रह चुके हैं, ये चार पूर्व वनमंत्री हैं ननकीराम कंवर, गणेशराम भगत, विक्रम उसेंडी और महेश गागड़ा। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ का संचालक मंडल भी भाजपा के विचारधारा और उसके सक्रिय सदस्य के लोग हैं। लेकिन वह भी अपने समुदाय के गरीब मेहनतकशों को कोई न्याय नहीं दिला पा रहे हैं।

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