लोकेश्वर सिन्हा गरियाबंद
गरियाबंद—राज्य शासन द्वारा विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति कमार परिवार के लिए विशेष योजना चलाकर उनका जीवन स्तर सुधारने के लिए नए नए योजनाए लागू कर कमार विकास अभिकरण को करोड़ो रूपये का आबंटन दे रही है। लेकिन धरातल पर देखा जाए तो ये योजनाए उन तक पहुच नही पा रही या केवल फाइल में ही उन योजनाओं को चलाकर विभागीय अधिकारी अपना फर्ज निभा रहे है जिससे उन जाति के लोग निरीह होकर अपना जीवन यापन करने मजबूर है । ऐसा ही एक परिवार गरियाबंद ब्लाक के ग्राम कोसमी (द) का है जो पिछले पांच वर्षों से पेड़ के डंगाली के बने एक झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे है, इसके साथ ही आए दिन मवेशियों के द्वारा या आंधी तूफान से उनका डंगाली व खदर से बना मकान ढह जाता है जिसे पुनः सुधार कर वे अपना जीवन यापन कर रहे है। ज्ञात हो कि गरियाबंद जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ग्राम कोसमी (द) पंचायत के अंतर्गत वर्षों से निवासरत 52 वर्षीय कमार परिवार जिसमे बंसीलाल और उसकी पत्नी जो पैरा प्लास्टिक की झिल्ली और पेड़ की डंगाली से बने खदर के मकान में पिछले चार पांच वर्षों से निवास कर रहे है। वे पांच वर्ष पहले कोसमी ग्राम में ही अपने रिस्तेदार साले के मकान में रहा करते थे, उसी दौरान उनका साला अपने मकान को किसी के पास बेच दिया जिससे वे बेघर हो गए है वही गाँव के ही अंतिम छोर में पैरा लकड़ी कपड़ा से बने मकान में रह रहे है। गौरतलब है कि ये खदर युक्त मकान को कभी मवेशी पैरा खाने की लालच में गिरा देते है तो कभी हल्की आंधी तूफान से उनका मकान ढह जाता है जिसे पुनः सुधार कर वे उसी मकान में गुजर बसर कर रहै है। हालांकि दो दिन पहले वो बुजुर्ग गरियाबंद परियोजना कार्यालय जो कमार भुंजिया के उत्थान के लिए बना है वहा अपनी मजबूरी लेकर आया था वहां आश्वासन तो मिला लेकिन उन्हें मकान कब मिलेगा ये कहा नही जा सकता। इस समस्या को लेकर परियोजना सलाहकार मंडल के अध्यक्ष संजय नेताम ने कहा कि मीडिया के माध्यम से पता चला है उस परिवार से जल्दी मुलाकात कर हर सम्भव उस परिवार को प्रशासनिक मदद करने आश्वासन दिया गया।
वर्षों से झोपड़ी में गुजर बसर कर रहा विशेष पिछड़ी जनजाति कमार परिवार* प्रशासन से मदद की दरकार
