स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही के बाद सुस्त, कही संबंधित विभाग का गुप्त सहयोग तो नही

लोकेश्वर सिन्हा….

गरियाबंद। जिले के ब्लॉक मुख्यालय के नगर में संचालित ओम साईं अस्पताल पर विगत 21 मई को गरियाबंद जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने व राजस्व अधिकारी एसडीएम तहसीलदार नायब तहसीलदार एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम में अस्पताल के अवैध संचालन को लेकर छापामार कार्यवाही की और अस्पताल को सीलबंद किया इस संबंध में की गई कार्यवाही के 15 दिवस होने के बाद भी अस्पताल के संचालक डॉ हरीश हरीत पर बिना किसी वैध कागजात रजिस्ट्रेशन एवं संचालन को लेकर विभाग की ओर से जवाब मांगे गए किंतु इतने दिनों तक कोई भी जानकारी नही दिया गया।

वही नगर के लोगो मे चर्चा है कि इतने दिनों तक विभाग द्वारा जांच व प्रकरण में आगे किस प्रकार विभाग की भूमिका होनी चाहिए। इसके चलते ही संबंधित जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एन आर नवरत्न से मोबाइल फोन पर ओम साईं अस्पताल को लेकर विभागीय कार्यवाही के संबंध में जानकारी ली गई तो वही जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नवरत्न ने कहा कि विभाग के द्वारा अस्पताल के संचालक को नोटिस जारी की गई है जिसमें संचालन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एवं अन्य जानकारियां मांगी गई है जैसे ही उनके द्वारा जानकारी दी जाती है आगे की कार्यवाही की जाएगी किंतु उनके इस बात से क्षेत्र के बुद्धिजीवी एवं जन चर्चा में यह बातें हो रही है कि 21 तारीख को की गई कार्यवाही के बाद 15 दिनों तक विभाग इतना सुस्त कैसे हो सकता है गरियाबंद जिले में हजारों झोलाछाप डॉक्टरों पर तो त्वरित कार्यवाही की जाती है किंतु फिंगेश्वर में वर्षों से चल रहे उक्त अस्पताल को लेकर विभाग की तरफ से निष्क्रियता समझ से बाहर है। संबंधित डॉक्टर द्वारा सोशल मीडिया में स्वयं ही वीडियो जारी कर इस बात को स्वीकार किया गया है कि मेरे द्वारा संचालित अस्पताल का रजिस्ट्रेशन कुछ वर्षों से नहीं हो पाया है ऐसे में कानून की भाषा में ऐसे संचालकों पर भारतीय दंड विधान की धारा एवं इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट की धारा के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है क्योंकि लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ ना हो इस बात को प्रशासन स्वयं गंभीरता से लेकर ही छापेमारी की कार्यवाही की है।

उल्लेखनीय है कि छापा मारने आई टीम ने मौके पर अस्पताल में 6 मरीजों को एडमिट पाया अधिक मात्रा में दवाइयां सामग्री प्राप्त की संस्था द्वारा संचालित एंबुलेंस एवं ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध पाए गए अन्य प्रकार की  गतिविधियां जो कि बिना प्रशासनिक अधिकार्य दस्तावेज के होनी चाहिए वह मौके पर नहीं हुई डॉक्टर ने स्वयं अपने दस्तावेज पेश नहीं किए ऐसी असामान्य स्थिति में टीम ने पंचनामा कर अस्पताल को तो सील कर दिया साथी ही खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा सोशल मीडिया को प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई जिसे जनहित में खबर प्रकाशित किया गया समाचार प्रकाशित करने पर संबंधित परिवार बौखलाहट वस पत्रकारों के खिलाफ अनाप-शनाप स्टेटमेंट एवं आरोप लगाने के कार्य सोशल मीडिया में करने लगे हैं जबकि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी किसी भी पत्रकार द्वारा द्वेष भावना से अस्पताल संचालन को लेकर व्यक्तिगत विरोध नहीं किया गया पत्रकार संघ ने इस मामले में जिलाधिकारियों एवं क्षेत्र के विधायक वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द ठोस कार्यवाही की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *