मुख्यमंत्री जी व्यक्तिगत तौर पर इस व्यवस्था पर नजर डाले और सुधार करें
भिलाई–नरवा गरवा घुरवा बॉडी ,
गौठान योजना,
गोबर खरीदी ,
जैसी योजना चलाकर गौधन के सम्मान का ढिंढोरा पीटने वाली छत्तीसगढ़ सरकार को खुला घूम रहे पशुधन की भी चिंता करनी चाहिए।
लॉक डाऊन में सब्जी होटल सहिंत अन्य व्यवसाय बन्द होने से खुले में घूम रहे पशुओं को जो कुछ खाने पीने मिल जाता था वह पूर्ण रूप से बन्द हो गया है जिसके चलते भुखे प्यासे अनेक पशुधन भी मौत के आगोश में भी समा रहे है ।सरकार गौधन व किसानों के सम्मान की बड़ी बड़ी योजनाओं का ढिंढोरा पिट रही किन्तु शहरों में गौधन खुला घूम रहे और गौठान खाली पड़े हैं ।सरकार जब गौठानों कि व्यवस्था हेतु आर्थिक व्यवस्था प्रदान करती है तो खुले में घूम रहे गौधन को इन गौठानों मे रख कर उनके चारा पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करे।उक्त मांग दुर्ग जिला ग्रामीण जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के जिलाध्यक्ष सतीश पारख ने की है ।
उन्होंने कहा की सरकार गौधन से जुड़ी अधिंकाश योजना फ़ेलवर साबित हुई है जिसके लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नही है जहां जहाँ सरकार ने गौठान बनाये हैं वो खाली पड़े है और गौधन खुले में आवारा घूम रहे है ।सरकार की योजना को धरातल में अमलीजामा पहनाने वाले प्रशासन में बैठे अधिकारी भी कागजी घोड़े दौड़ाकर सरकार को गुमराह करने से बाज नही आ रहे है ।सरकार को अपनी इस महती योजना पर कोई ईमानदार जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि के माध्यम से जमीनी हकीकत का सर्वे करवाना चाहिये कि क्या हकीकत में योजनाओं का लाभ मिल रहा है या बडी बडी बातें विज्ञापन व समाचार के माध्यम से करके जनता को गुमराह किया जा रहा है ।
सतीश पारख ने व्यक्तिगत तौर पर मुख्यमंत्री को इस योजना को अपने संज्ञान में लेकर इसकी जमीनी हकीकत पर नजर डालने का आग्रह किया है । ताकि कॅरोना काल मे भूखे प्यासे घूम रहे आवारा पशुओं को गौठान योजना के माध्यम से चारा पानी की व्यवस्था सुनिश्चित हो ।
