राजनादगाँव।छत्तीसगढ़ राज्य के जिला राजनादगाँव को सोयाबीन की खेती के नाम से जाना जाता है तथा रिलायंस फ़ाउंडेशन क्रमश: दो विगत वर्षो से यहाँ के किसानो को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। इस जिला के अंतर्गत छुहीखदान ब्लॉक मे खपरीदरबार गाँव स्थित है। इस गाँव के किसान मुख्यतः किसानी पर ही निर्भर रहते है। यहाँ के किसान खरीफ और रबी दोनों मौसम मे खेती करते है, खरीफ मे धान, सोयाबीन मूंग, उरद और रबी मे तरबूज, गेहूं, चना, सब्जी इत्यादि फसल का उत्पादन करते है। यहाँ काली मिट्टी पायी जाती, है जो खेती के लिए अत्यंत उपजाऊ है। साथ ही इस गाँव मे बांध होने के कारण पानी के भरपूर संसाधन है। इसी गाँव मे मोहन जंघेल नाम का एक किसान रहता है, जिसकी उम्र 49 वर्ष है तथा उनकी शिक्षा एम. ए. (राजनितिक शास्त्र) है। किसान के परिवार मे कुल 4 सदस्य है जिसमे किसान, उसकी पत्नी और दो बच्चे रहते है। मोहन के पास कुल 35 एकड़ ज़मीन है जिसमे वह 12 एकड़ मे सोयाबीन और 23 एकड़ मे धान की खेती करते है। किसान अपने पारिवारिक खर्च और बच्चे की पढ़ाई एक मात्र खेती के भरोसे ही करते है। उन्हे कई वर्षो से सोयाबीन की खेती मे मौसम की मार, रोग व कीट पतंग के कारण उपज मे भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा था कई बार उपज इतना कम मिलता था की खेती मे हुए खर्चे का पैसा भी वसूल नहीं हो पाता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मे भी गिरावट आने लगी थी।
जुलाई 2020 मे किसान को रिलायंस फ़ाउंडेशन के कार्यकर्ता से पता चला की रिलायंस फ़ाउंडेशन और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा धान और सोयाबीन फसल मे कीट व रोग नियंत्रण पर कॉन्फ्रेंस कॉल आयोजित की जाने वाली है, जिसमे किसान ने रुचि दिखाकर अपना नाम और नंबर जुड़वाया।

किसान ने इस कॉन्फ्रेंस कॉल मे वैज्ञानिक से अपने सोयाबीन फसल के बारे मे चर्चा की । उन्होने बताया की सोयाबीन के पौधे का ऊपरी भाग कट कर गिर रहा है साथ ही पत्ते मे पीले धब्बे बन रहे है। किसान की पूरी बात सुनकर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अंजलि और डॉ मोनालिशा जंघेल ने किसान को बताया कि सोयाबीन मे रिंग कटर कीट के कारण पौधे का ऊपरी भाग गिर जा रहा है । यह शाखा के ऊपरी भाग को गोलाई से काट कर खा जाता है जिससे शाखा सुख कर गिर जाती है, जिसके कारण फलियाँ बन नहीं पाती है, उन्होंने सलाह दी कि इसके नियंत्रण के लिए Chlorpyrifos 20%EC का 3 मिली. प्रति लीटर से स्प्रे करे साथ ही वैज्ञानिक ने बताया की सोयाबीन के पत्तियों मे पीले धब्बे के मुख्य: कारण चूसक कीट है, इसके नियंत्रण के लिए कीटनाशक Imidacloprid 17.8%SL 0.5 मिली प्रति लीटर व Hexaconazole 5% EC फफूंदनाशक 1.5 मी प्रति लीटर पानी मे डालकर स्प्रे करे।
उपरोक्त सलाह को किसान ने अपने सोयाबीन के खेत मे प्रयोग किया, जिससे किसान को 6 से 6.5 कुंटल सोयाबीन प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। जो पिछले साल के अपेक्षा में 1.5- 2 कुंटल प्रति एकड़ अधिक उत्पादन हुआ। इस प्रकार किसान का कुल उत्पादन 74.4 कुंटल हुआ, जिसे किसान ने 4200रु प्रति कुंटल से बेचा, जिसमे किसान को कुल लागत 103200 रुपये हुये। सभी लागत को काट कर किसान को 209280रु शुद्ध मुनाफा हुआ।
मोहन जंघेल ने कहा की “इस साल के सोयाबीन के खेती से मुझे दो लाख रुपए का आय प्राप्त हुआ, इस पैसे के कुछ भाग के उपयोग से मैंने 4 एकड़ मे कृषि विभाग द्वारा प्राप्त सबसिडी से ड्रिप लाइन पाइप और खेत को तार से घेरा करवाया। इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए मैं रिलायंस फ़ाउंडेशन और कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी राजनन्दगाँव का आभार व्यक्त करता हूँ।“
