? ब्यूरो रिपोर्ट विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर के ग्राम पंचायत बिरीघाट चचरापारा प्राथमिक शाला सन 2000 से जर्जर हालात में खड़ा है बच्चों के सुरक्षा के मद्देनजर अभी प्राथमिक स्कूल को मिडिल स्कूल को मर्ज़ कर दिया गया है जिससे चरापारा के बच्चे जो कि 6 से 10 साल के हैं उनको रोजाना 3 से 4 किलोमीटर पैदल जा कर बिरीघाट में पढ़ाई करना पड़ रहा है , ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पुराने जर्जर स्कूल भवन को गिराने का आदेश है और उस जगह पर नई स्कूल भवन निर्माण करने का स्वीकृति भी मिला है स्कूल समिति ने जानकारी देकर बताया कि सन 2006 से स्वीकृति मिली हुई है स्कूल बनाने का कार्य शुरू भी हुआ सिर्फ स्कूल के नींव तक ही सीमित होकर रह गया है 2006 से अब 2021 आ गया करीब 15 साल गुजर गए लेकिन इस आदिवासी पारा के बच्चों को शिक्षा नसीब नहीं हो रहा है
स्कूल निर्माण के स्वीकृत राशि 4 लाख 18 हज़ार ! बंदरबाट का आशंका
ग्राम पंचायत बिरिघाट मे स्थित चचरा पारा में स्थित माध्यमिक शाला जो की बहुत ही जर्जर हो चुकी है जिसमें बच्चों की पढ़ाई होना, बहुत ही समस्या उत्पन्न हो रही है स्कूल संचालक समितियों ने बताया कि1997 में बना यह माध्यमिक शाला पुनः जब शिक्षा विभाग के तहत 2006 में नया भवन के लिए प्रस्ताव पारित हुआ तो 2006 में ₹418000 स्वीकृत हुए जिसका सिर्फ नींव ही बनाया गया है उसके अलावा कुछ नहीं और पूरे 15 साल बित गए न कभी जांच में कोई आया न कभी पूछने आया कि आखिर स्कूल बना या नहीं ऐसे में ग्रामीणों की नाराज़गी साफ तौर पर झलक रहा है ग्रामीण कोई बड़े आला अधिकारियों की मिलीभगत कर स्कूल भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ने के अंदेशा जताया है
स्कूल का नींव 2006 से
पालको और ग्रामीणों द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ सरकार से विनती की है की उनको न्याय नहीं मिल रहा उनका बच्चा शिक्षा के मूल अधिकारों से वंचित हो रहे है, अधिकारियों के ऊपर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने गुहार लगाई है कि सरकार इसकी जाँच करें और आरोपियों पर कार्यवाही करें साथ ही पिछले 15 सालों से तरसती जिंदगी को शिक्षा के मुख्यधारा से जोड़े ताकि यहाँ के आदिवासी बच्चे को सुलभ शिक्षा का लाभ मिल सके
बिरीघाट पूर्व सरपंच सचिव व कार्यकर्ता सवालों के घेरे में
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व सरपंच भुवन मांझी एवं सचिव सलाम खान द्वारा भवन निर्माण हेतु ठेकेदारी दिया गया जोकि विगत कई वर्षों से अपूर्ण है केवल प्रशासन को दिखाने मात्र के लिए कुछ ईटों को जोड़कर दिखा दिया गया है इस तरह स्वीकृति मिला कार्य कई वर्षों से लंबित है ऐसे में सवाल खड़े होना लाज़मी है कि चचरा पारा का स्कूल आखिर गया कहाँ
ज्ञात हो कि इन दिनों बिरीघाट का पौधा रोपण के मामला जिसमे करोड़ो रूपये के भ्र्ष्टाचार होने का आरोप है जिस पर आरोपियों को सज़ा दिलाने की मांग लगातार उठ रहा है मामला अभी तक सुलझा नही है इस बीच और एक मामला सामने आ गया बिरीघाट चचरा पारा का प्राथमिक स्कूल


शिक्षक अवतार सिन्हा ने बताया मौजूदा हालात अति दयनीय
स्कूल की अव्यबस्थाओं को लेकर जब प्रश्न चचरा पारा प्राथमिक स्कूल के शिक्षक अवतार सिन्हा से पूछा गया तो उन्होंने बच्चों को हो रही परेशानीयों का जिक्र किये ज्ञात हो कि शिक्षा के अभाव में बालक बालिकाएं विद्या अध्ययन करने हेतु चचरापारा से बिरीघाट हाई स्कूल जिसकी दूरी 3 से 4 किलोमीटर दूरी है जहां बच्चों को आने जाने में दिक्कत होती है वहां बच्चों के पालक को से वार्तालाप करने पर बताया कि ग्रामीणों ने स्कूल के समन्वयक के माध्यम से बीआरसी मैनपुर के बीओ एवं सीओ को इस सम्बंध में ज्ञापन सौंपा गया है
शिक्षक अवतार सिन्हा
बावजूद अभी तक कुछ भी प्रशासन द्वारा लाभ नहीं मिल पाया और प्रधान पाठक अवतार सिन्हा जी बताते कि इन सभी समस्याओं के चलते हुए बच्चों के पढ़ाई में विभिन्न प्रकार की दिक्कत उत्पन्न हुई और बच्चों के पढ़ाई हो को मध्य नजर रखते हुए उनको बीरी घाट में स्थित हाई स्कूल में बच्चों के अध्ययन के लिए वहां बच्चों को स्थानांतरण किया गया जहां बच्चे तीन से 4 किलोमीटर की दूरी पर चलकर के वहां विद्या अध्ययन करते हैं इस प्रकार से बच्चों को बहुत समस्याओं एवं दिक्कतों का सामना करना पढ रहा है
ग्रामीणों ने सरकार से गुहार लगाई है शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु इसमें ग्राम प्रमुख जनक राम ध्रुव घासीराम ध्रुव आलम नागेश टंकाधर यादव चक्रधर यादव शंकर लाल यादव जय सिंह ध्रुव एवं सरपंच प्रेमशिला नागेश द्वारा बताया गया कि इस प्रकार शिक्षा प्राप्त के लिए बच्चों को विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ रहा है यहां तक के पालको को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा है जिनसे वह इन समस्याओं से जल्द से जल्द निराकरण की मांग करना चाहते हैं और जनप्रतिनिधियों से लगातार मिलते हुए इन समस्याओं से अवगत करवा रहे हैं ताकि जल्दी से इस समस्याओं से निजात मिले और बच्चों की पढ़ाई एवं किसी प्रकार की भी अड़चन उत्पन्न ना हो।
